मुलायम की मैक्यावली निति : बेटे और पार्टी दोनों को बचाया , जल्द होगी शिवपाल और उसके गुंडे नेताओं की छुट्टी
| 30 Dec 2016

जन उदय : समाजवादी पार्टी के लिए आज का दिन या आने वाले इससे भी वीभत्स दिन उसी दिन तय हो गए थे जिस दिन मुलायम सिंह ने सब को एक तरफ कर अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाया था , लेकिन ये बात मुलायम के वश में थी की उनके फैसले के खिलाफ कोई बोलने वाला नहीं था , लेकिन सभी को शांत करने के लिए मुलायम को शमन निति को अपनाना पड़ा शायद यही बात मुलायम को महंगी पढ़ती गई और इसी वजह से पिता –पुत्र में तनाव बढ़ गया .
वर्तमान तनाव से पहले एक बार पहले भी शिवपाल यादव की वजह से अखिलेश और मुलायम में तकरार हो चुकी है जिसके कारण राम गोपाल यादव को पहले भी पार्टी से निकला गया

खैर अब मुलायम की मैक्यावली निति को समझते है . अखिलेश मुलायम का बेटा है और मुलायम की दिली इच्छा है की अखिलेश समाजवादी पार्टी को आगे लेकर जाए , चूँकि अखिलेश को कोई राजनैतिक ज्ञान नहीं है और न ही अनुभव है और इसी बीच शिवपाल के पास मुलायम का भाई होते हुए दुनियाभर के राज और ताकत है जिसमे गुंडा ताकत , और अन्य लीडर है अगर शिवपाल और अखिलेश को आमने सामने कर दिया जाए तो यकीनन अखिलेश की हार होगी और अखिलेश का राजनैतिक जीवन खतरे में पढ़ जाएगा सो यह जरूरी हो गया था की अखिलेश को कुछ समय के लिए अकेले छोड़ा जाए ताकि वह खुद गिरे और खुद उठे और उसे समझ आ जाए की आखिर यु पी और समाजवादी की राजनीती है क्या .. बर्बाद तो अखिलेश को होने नहीं दिया जाएगा क्योकि अंत में पिता तो है न अखिलेश को संभालने के लिए .. और सफल रहा तो मुलायम को ख़ुशी ही होगी और इस बीच मुलायम शिवपाल जैसे गुंडे और उसके समर्थको को ठिकाने लगा देगा , इससे पहले भी मुलायम ने बड़े बड़े गैंग्स्टर को ठिकाने लगाया है जो भाजपा और कांग्रेस के समर्थन से चलते थे , ( यु पी के महेंद्र फौजी , सतबीर गुर्जर और अन्य सबको याद होंगे )

अब सवाल यह है की चुनाव के वक्त यह नोटंकी क्यों ?? तो साफ़ बात है इस वक्त यह सब कुछ होने से समाजवादी पार्टी को कुछ नहीं खोना क्योकि यह बात तो तय है की इस बार समाजवादी नहीं बहुजन समाज पार्टी चुनाव में जीतेगी और पांच साल का समय मुलायम के लिए काफी है और अगर इस बीच मुलायम को कुछ हो भी जाता है तो भी मुलायम अखिलेश के लिए इतना कर देंगे की अखिलेश को शिवपाल जैसे गुंडों की शरण में नहीं आना पढ़ेगा .... देखभाल के लिए राम गोपाल को छोड़ दिया है पीछे

खैर ब्राह्मणवादी मीडिया के कुकुर खूब मजे ले रहे है की और बढ़ चढ़ कर दिखा रहे है की जैसे समाजवादी पार्टी खत्म हो गई , लेकिन ऐसा नहीं होगा