एमडीएच के धरमपाल गुलाटी एफएमसीजी सेक्टर के सबसे महंगे सीईओ
| 17 Jan 2017

नई दिल्ली, 17 जनवरी (एजेंसी)। एमडीएच मसाले के सीईओ धरमपाल गुलाटी ने बीते वित्तीय वर्ष में 21 करोड़ रुपये कमाई की है। यह आंकड़ा गोदरेज कंज्यूमर के आदि गोदरेज और विवेक गंभीर, हिंदुस्तान यूनिलिवर के संजीव मेहता और आईटीसी के वाई सी देवेश्वर की कमाई से भी ज्यादा है। उनकी कंपनी महाशियां दी हट्टी (एमडीएच) ने इस वर्ष कुल 213 करोड़ रुपये का लाभ कमाया है। इस कंपनी के 80 फीसदी हिस्सेदारी गुलाटी के पास है। वर्ष 1919 में धरमपाल गुलाटी के पिताजी ने पाकिस्तान के सियालकोट में एक छोटी सी दुकान खोली थी। लेकिन धरमपाल गुलाटी ने इस छोटी सी दुकान को 1500 करोड़ रुपये के साम्राज्य में तब्दील कर दिया। इस मसाला कंपनी के करोड़ों रुपयों के साम्राज्य में करीब 20 स्कूल और एक हॉस्पिटल शामिल है।
देश के विभाजन के बाद गुलाटी दिल्ली के करोल बाग आकर बस गए थे। तब से वह भारत में 15 फैक्ट्रियां खोल चुके हैं जो करीब 1000 डीलर्स को सप्लाई करती हैं। एमडीएच के ऑफिस दुबई और लंदन में भी हैं। कंपनी लगभग 100 देशों में निर्यात करती है। एवरेस्ट ब्रैंड के मालिक एस नरेंद्रकुमार 13 फीसदी शेयर के साथ बाजार की अगुवाई कर रहे हैं जबकि उनके पीछे 12 फीसदी शेयर के साथ एमडीएच है। मसालों और सॉस इत्यादि की बिक्री वर्ष 2016 में 16 फीसदी बढ़ी है। मसाला बाजार में डीएस फूड्स, रामदेव जैसी घरेलू कंपनियां भारत में आगे हैं जबकि सॉस जैसे अंतरराष्ट्रीय उत्पादों में नेस्ले और हिंदुस्तान यूनिलिवर जैसी कंपनियां आगे हैं। फ्यूचर ग्रुप के एफएमसीजी प्रेजिडेंट देवेंद्र चावला ने बताया, एक्सपोर्ट मार्केट में अपनी जगह बनाना भारत के घरेलू बाजार में जगह बनाने से कहीं ज्यादा आसान है क्योंकि यहां हर राज्य या क्षेत्र में लोगों की पसंद बदल जाती है।
यह एक बड़ी चुनौती है। भारतीय कंपनियां इस मामले में भी सीमित रह जाती हैं क्योंकि वे नए उपभोक्ता वर्ग युवाओं के लिए चाइनीज, थाई और इटैलियन कंपनियों जैसे उत्पाद नहीं उतार पाती है। एमडीएच के 60 से ज्यादा उत्पाद है। इनमें देगी मिर्च, चाट मसाला और चना मसाला सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पाद हैं। हर महीने इनके करोड़ों पैकेट्स की बिक्री हो जाती है। एमडीएच के वाइस प्रेजिडेंट राजिंदर कुमार ने कहा, हम अपने प्रतिस्पर्धियों को कीमतों से मात दे रहे हैं। अन्य कंपनियां हमारी प्राइसिंग स्ट्रैटजी को अमल में लाने की कोशिश करती हैं। चूंकि हम कीमतें कम रखते हैं इससे हमें ओवरऑल अधिक फायदा होता है।