आम लोगो के खून पसीने के कमाई लूट रहा है एच डी ऍफ़ सी बैंक क्यों नहीं दिखा रहा एच डी ऍफ़ सी के घोटाले को भारत का मीडिया
| 28 Feb 2017

जन उदय : हमने पिछली रिपोर्ट में बताया था कि कैसे लोगो के के खून पसीने की कमाई लूट लूट कर लोगो को मुर्ख बना कर एच डी ऍफ़ सी बैंक उनको इन्सुरेंस आयर मेडिक्लेम बेचता है लेकिन जब जरूरत पढ़ती है इस क्लेम की तो न तो यह क्लेम मिलता है और न ही न्याय

एक आंकड़े के अनुसार हर साल सिर्फ मेडिक्लेम से खरबों रूपये लोगो से वसूल कर लेता है लेकिन जितने लोग जब अपनी इस मेडिक्लेम पालिसी का फायदा उठाना चाहता है तो बैंक किसी ने किसी बहाने से क्लेम को मना कर देता है
ऐसा ही किस्सा गाजिअबाद के वैशाली में स्थित पारस हस्पताल से सामने आया है जहा पर राज रानी नाम की महिला अपने इलाज के लिए अपनी मेडिक्लेम पालिसी ले कर पहुची . पालिसी देखने के बाद हस्पताल ने उसका इलाज शुरू कर दिया क्योकि वो जिस बिमारी का इलाज कर रहे थे वो बिमारी पालिसी के दायरे में आती थी और तीन साल पुरानी भी थी ,

लेकिन हद तो तब हो गई की इलाज करने के बाद पारस हस्पताल ने राज रानी के हाथ में ५२ हजार रूपये का बिल थमा दिया यह कह कर की एच डी ऍफ़ सी ने यह कह कर मना कर दिया है की आपको थाइराइद की बिमारी भी है जिसका जिक्र आपने तीन साल पहले पालिसी लेते वक्त जिक्र नहीं किया था

इस पर राजरानी ने कहा की यह तो वह बिमारी ही नहीं है जिक्सा इलाज चल रहा है इलाज सिस्ट का है इसका थाईराइड से क्या मतलब लेकिन एच डी ऍफ़ सी के एर्गो ने यह कह कर राज रानी को मेडिक्लेम पास नहीं किया क्योकि उसमे उसने झूट बोला था .,

जब राज रानी ने यह पूछा और कहा की अगर मुझसे गलती हुई तो आपने पालिसी देने से पहले इस बात की जांच क्यों नहीं की मैंने सच बोला है या झूट यानी एक टेस्ट जिसमे सारी बिमारी का पता चले इसको आवश्यक क्यों नहीं किया ??? इसका एच डी ऍफ़ सी के पास बिलकुल नहीं था , जिस बिमारी के इलाज के लिए क्लेम माँगा गया वो पालिसी में कवर है लेकिन फिर भी मेडिक्लेम नहीं दिया गया

राजरानी की घटना २० फरवरी २०१७ की है लेकिन इससे पहले हजारो ऎसी घटनाए होती रहती है कि जब लोग अपनी मेडिक्लेम पालिसी का क्लेम मांगते है उस वक्त एच डी ऍफ़ सी एर्गो और बैंक उनके क्लेम को मना रा देते है यानी यह एक तरह की अप्रत्यक्ष लूट और फ्रोड है जिसके जरिये ये लोगो को बेवकूफ बना कर पालिसी बेच देते है ...
अगर मान ले की कुछ लोग झूट बोल देते है या अपनी बिमारी छिपा लेते है तो क्या यह बैंक का याबिमा कम्पनी का यह फर्ज नहीं बनता की अपने क्लाइंट की यानी जिस व्यक्ति ने मेडिक्लेम लिया है उसकी जांच करवाई जाए और यह जांच आवश्यक रूप से हो ..

एक आंकड़े के अनुसार एच डी ऍफ़ सी मेडिक्लेम के लिए मना करने में नम्बर वन है यानी २० से २५ % ही क्लेम पास करता है और वह भी उसमे कुछ चार्ज इधर उधर के बहाने बना देता ही नहीं

यह एक लूट है जिसकी शिकायत समय समय पर ग्राहक फोरम में चल रहे है लेकिन सरकार और मंत्री कोई कार्यवाही नहीं करते क्योकि उनकी सरकारों को अप्रत्यक्ष रूप से करोडो का चंदा या फायदे इनको मिलते है

कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई है राजरानी ने उस ऑडियो रिकॉर्डिंग के लिए जिसकी बात एच डी ऍफ़ सी बार बार कर रहा है की उनके एजेंट ने सारी बीमारियो के बारे में पूछा था ‘ की मांग की लेकिन एक हफ्ते से बैंक इस रिकॉर्डिंग को नहीं दे रहा था , लेकिन बार बार फोन करने पर यह रिकॉर्डिंग दी गई तो बातचीत के आधार पर या एजेंट ने सिर्फ यह पूछा आप कभी बीमार तो नहीं रहे , या आपका कोई एक्सीडेंट तो नहीं हुआ तो राजरानी के पति श्री सुरेंदर कुमार ने साफ़ साफ़ मना कर दिया “ अब उस रिकॉर्डिंग को यानी इतनी से बातचीत जो आधारहीन है के आधार पर राजरानी को क्लेम नहीं दिया जा रहा है

हालांकि यह कोई पहली और आखिरी घटना नहीं है एच डी ऍफ़ सी की वजह से लाखो लोग परेशान घूम रहे है लेकिन न तो सरकार और न ही अपने आपको राष्ट्रवादी बताने वाला मीडिया इस पर कुछ बोल रहा है


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