सनक और वोट बैंक के लिए लड़ी गई कारगिल लड़ाई, इसलिए सही है जवानो को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा
| 01 Mar 2017

जन उदय : कुछ लोगो को यह लगता है की दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुर्मोहर कौर ने कोई ऐसी बात कर दी है जिससे उसने देश के जवानो का और देश का अपमान किया है और इसलिए सब लोग अपनी अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए उस छात्रा पर शब्दों के तीखे बाण चला रहे है और अपनी मर्दानगी दिखाने के लिए उसे मारने और बलात्कार तक की धमकी दे रहे है .

इससे पहले कोई भी व्यक्ति अपने किसी निर्णय पर पहुचे हम ज़रा कुछ वाकया को याद कर लेते है और कुछ लोगो के चरित्र पर भी रौशनी डालेंगे .
सबसे पहले कारगिल लड़ाई की बात करते है और यह भी जानते है की यह इस तरह की लड़ाई भाजपा शासन काल में ही क्यों हुई ???

भाजपा अपने एक ऐसे राष्ट्रवाद को प्रोमोट करता है जिसमे उन लोगो की जगह बिलकुल नहीं होती जो लोग इनकी बातो का विरोध करते है अब चाहे वो हिन्दू हो मुस्लिम हो या इसाई और जाहिर सी बात है की भाजपा सिर्फ एक वर्ग की बाते करती है यानी उनकी बातो का समर्थन करने वाले हिन्दुओ की, न कि सारे हिन्दुओ की ही कारण रहा गुजरात का नरसंहार हुआ, इसके बाद मुंबई अटैक सेभी भाजपा ने राष्ट्रवाद को भुनाया, और गुजरात में भी अक्षरधाम मंदिर पर हमले को भी राष्ट्रवाद से जोड़ा

यानी भाजपा का राष्ट्रवाद एक ऐसे हिन्दुवाद को बढ़ावा देता है जिसमे मानवता की इंसानियत की महिलाओं की लोकत्रंत्र की कोई जगह नहीं है बस ये जो कहे वही सही है चाहे गलत हो या सही
ये लोग अख़लाक़ की हत्या गो- आतंकियो द्वारा दलित उत्पीडन सब राष्ट्रवाद की निसानी है और काम है जिसे ये करने से पीछे नहीं हटते

पिछले साल रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के बाद भी ये लोग आतंक का सहारा लेते रहे आर उसकी हत्या को सही ठहराते रहे जब रोहित वेमुला की हत्या का शोर पूरी दुनिया में होने लगा तो इन लोगो ने जे एन यु में वामपंथी दलों से मिल कर एक स्वांग रचा और उसमे डॉक्टरड विडियो के जरिये पुरे देश को राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाने लगे जब की असलियत यह थी कि इन्हें रोहित वेमुला की हत्या को दबाना था

फिलहाल का परिद्रश्य देखे एकदम काफी मिलता जुलता है यानी यु पी चुनाव से पहले एक सर्जिकल स्ट्राइक हुई जवानो के सर काट लिए गए और फिर इसके नाम पर राष्ट्रवाद और बहादुरी का पाठ देश को पढ़ाया जाने लगा देश के कुंठित मानसिकता के लोगो को यह अहसास कराये जाने लगा की वो बहादुर है यानी ५६ इंच है खुद प्रधानमंत्री ने इस बात को चुनाव के लिए भुनाने की कोशिस की

लेकिन ऐस हो नहीं पाया और अंत में अब जब यु पी चुनाव हो रहे है ऐसे में मोदी ने खुद चुनाव को एक कम्युनल रंग देने की कोशिस कभी हिन्दू – मुस्लिम के लिए बिजली कभी रेल दुर्घटना में पाकिस्तान का हाथ आदि आदि कुल मिला कर चुनावी षड्यंत्र

कारगिल वार भी ठीक चुनाव से पहले लड़ा गया युद्ध था जिसको मीडिया के जरिये गल्फ वार के जरिये अमीरका ने पूरी दुनिया को मौत का तांडव दिखाया ठीक उसी तरह भारतीय मीडिया ने सरकार के कहने पर कारगिल युद्ध को मीडिया में दिखा दिखा युवाओं में और आम लोगो में राष्ट्रवाद को भरना शुरू कर दिया उनके ताबूत घर लाने उनके गाव लाने शुरू हो गए शहीदों की लाश की रैलिया निकाली गई, वो बात गलग है की ताबूत और कफन तक के पैसे संघी खा गए इसके अलावा जिस तरह से सेना ने उध लड़ा उससे भी यही साबित हुआ की खुद सेना इस युद्ध को लंबा खींच रही थी और युद्ध में जवानो के मरने का इन्हें कोई गम नहीं था यानी युद की निति बहुत खराब और बेवकूफी के स्तर पर थी अगर निति सही होती तो इतने जवान सहीद नही होते बल्कि हद से हद एक दिन में ही आतंकवादियो को ढेर कर दिया जाता यानी जानबूझ कर सैनिको को मरवाया गया

कुल मिला कर कारगिल युद्ध वोट के लिए और भाजपा सरकार की सनक के कारण हुआ जिसमे बेक़सूर जवानो की आहुति दी गई अगर ऐसे में कोई कहता है की उसके पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा तो क्या बुरा कहता है ????

जवान तो जिस दिन वर्दी पहन लेते है उसी दिन जान को देश के नाम कर देता है लेकिन क्या यह सही है की वो नेताओं की सनक के लिए जान दे , क्या जरूरी है की देश के आंतरिक हमले में वो मारा जाए ???? नहीं नहीं ये जवान देश पे मर मिटने वाले देश के दुशमनो के खिलाफ लड़ने के लिए है न की आपकी सनक पूरी करने के लिए ये एक तरह की देश से गद्दारी है अगर जवानो को आज भी कश्मीर में और अन्य स्थानों पर मरवाया जाता है