वैसे बहुत जरूरी था मायावती का हारना : क्योकि अब होगी पुरे देश में नीली क्रान्ति: दलित हो जाए तैयार
| 12 Mar 2017

जन उदय : कुछ दलित चिंतक और उन लोगो को यह पढ़ कर बड़ा गुस्सा आएगा या निराशा होगी की जिस तरह मायावती की यु पी चुनाव में हार हुई उससे दलित समाज को कैसे फायदा होगा या कैसे देश में नीली क्रान्ति होगी ??

जी हाँ मायावती की हार दलित चिंतको के लिए शुभ संदेश है क्योकि पिछले दस सालो से मायावती का जो रवैया हो गया था वह बड़ा ही चिंताजनक था और दलित चिंतको में एक उदासी पैदा कर रहा था उसके कई मुख्य कारण थे उसमे सबसे पहला कारण यह था की मायवाती से आम कार्यकर्ता मिल ही नहीं सकता था , दुसरा मायावती एक तरह की कैद में थी जो की हार के बाद यह कैद टूट गई है इसकी उम्मीद की जा रही है

अब देखिये सबसे पहले मायवाती उन लोगो को बाहर का रास्ता दिखायगी जिन्होंने मायवती को जमीनी कार्यकर्ता से दूर कर दिया था जो मायवती को सपने में भी नहीं मिल सकते थी लेकिन अब मायवती की नींद टूटी है और उसे अपना अस्तीत्व बचाने के लिए अपने महल यानी पिजरे से बाहर निकलाना होगा और जमीनी कार्त्कर्ता से न सिर्फ मिलना होगा बल्कि खुद जमीनी स्तर पर काम भी करना होगा मायावती का जमीन पर काम करने से कार्यकर्ता के होंसले बढ़ेंगे और इसके अलावा दलित चिंतक अपने विचार बहिन मायवती के सामने रख सकेगे जो निश्चित रूप से बाबा साहेब और कांसीराम जी के विचारों को आगे बढाने वाले होंगे और उन कमियों को क दूर करने के बारे में होंगे जिनसे हार होती है

इसके अलावा बहिन मायावती को एक महारानी के रूप से भी बाहर होना होगा और इस ट्रेंड को खत्म करना होगा की पहली और आखिरी अम्बेडकरवादी और बी एस पी की सुप्रीमो वही है यानी मायवाती को कुछ दलित लीडर अ अपने पैर्लैल खड़े करने होंगे जो अपने अपने क्षेत्रो में काम भी करेंगे , पार्टी प्रवक्ता होंगे और पार्टी की तरफ से मीडिया को भी स्म्भाल्न्गे या संभालना होगा इससे जमीनी स्तर और व्यापक स्तर पर काम होगा और पार्टी में लोकतांत्रिक धारा का प्रावह होगा

पार्टी की हार पर उन कारणों की जांच भी की जाएगी जिसमे सोशल मीडिया में और युवा वर्ग में कैसे काम किया जाए इसकी एक स्ट्रेटेजी तैयार की जाएगी और जाहिर इसमें जयादा से जयादा युवाओं का शामिल होना तय है
अगर मायवती को २०१९ में अपने आपको लोकसभा में लाना है और पार्टी को लुप्त होने से बचाना है तो यह काम करना ही होगा , मायवाती बहुत खुशनसीब है की मायवाती के समाज के लोग भूखे रह जाते है लेकिन पार्टी को चंदा देना नहीं भूलते और मायवाती को भी इस बात की इज्जत रखनी चाहिए , मान रखना चाहिए

अगर मायवाती ने यह नहीं किया तो उसको खुद अपनी सुरक्षा के लिए संघ की शरण में ही जाना पड़ेगा यानी बी जे पी के कदमो में सर रखना होगा जिसको कोई भी दलित बर्दास्त नहीं करेगा .. या मायवाती को गरीबो की दौलत लेकर विदेश भागना होगा क्योकि कम से कम भारत में तो वह दलित राजनीति नहीं कर पायगी बल्कि सीदी जेल में होगी , क्योकि संघ कांग्रेस सभी की एक एक राय है कि देश से दलित नाम की राजनीति और इसके प्रतिनिधि खत्म हो जाए जिसमे सिर्फ और सिर्फ मायावती को ही शिकार बनाया जाएगा .

मायावती के लिए यह एक सुनहरा अवसर है क्योकि इस वक्त पुरे देश के दलित उसके साथ है और अपना तन मन धन देने को तैयार है और मायवाती को इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए , क्योकि यह वक्त दुबारा नहीं आयगा और अगर मायवाती ने इस वक्त का फायदा उठा लिया तो वह दिन दूर नहीं पुरे देश में नीली क्रान्ति हो जाएगी क्योकि कांग्रेस अपनी उम्र जी चुकी , और उसका प्रतिनिधि भोंदू है और भाजपा इस वक्त अपने आतंक की इन्तहा करते जा रही है ये लोग कुछ भी अनैतिक कार्य करने से नहीं रुक रहे है इन लोगो ने सविंधान , कानून सबको ताक पर रख दिया है और इसका अंत सिर्फ बी एस पी ही कर पाएगी .

इस लिए दलित विचारक , चिंतक और कार्यकर्ताओं को इस हार को अशुभ नहीं शुभ मानना चाहिए क्योकि इस हार से बहुत बड़ा सबक सीखने को मिला है और यह हार जमीनी स्तर पर काम करने के लिए प्रेरित कर रही है