हिन्दू नाम कवच है ब्राह्मणों का ,ये हिन्दू नहीं विदेशी हमलावर है
| 27 Mar 2017

न उदय : इतिहास की विवेचना कर लीजिये ब्राह्मण द्वारा लिखे सारे ग्रन्थ छान मारिये जिन्हें ये भगवान् का संदेश बता कर पेश करते है जो भगवान् ने इन्हें संस्कृत में दिए थे , कही भी आपको हिन्दू शब्द नहीं मिलेगा , मिलेगा तो वर्ण वाव्य्स्था या जातिवाद वो भी भारतीय समाज में जिसे ब्राह्मण समाज ने खुद अपनी धूर्त चाल के तहत समाज को बांटने के लिए बनाया

१८० ई. पू में सम्राट अशोक के पोते व्रह्दस्थ की हत्या करने के बाद पुष्यमित्र शुंग जो घोर ब्राह्मणवादी था उसने लाखो बौध लोगो की हत्या की और बचे हुए बौध लोगो को अपना गुलाम बना लिया और इनकी गुलामी को चिरस्थाई बनाने के लिए एक धार्मिक षड्यंत्र रच लिया इसको वर्ण वाव्य्स्था और जातिवाद कहते है और इसके सबसे निचले स्तर पर यहाँ के मूलनिवासी बौध लोगो को रखा यानी शुद्र

बौध लोगो की यह गुलामी लम्बी चली जिसका कारण यह रहा की ब्राह्मणों ने बौध लोगो को अपना सांस्कृतिक गुलाम बना लिया यानी यह कह कर की यह सामाजिक आर्थिक वाव्य्स्था भगवान ने बनाई है
इसके बाद भारत में आने वाले हर हमलावर का झगड़ा शासक कौम से तो रहा लेकिन इन ब्राह्मणों से नहीं रहा ऐसा क्यों , एक शोध में यह पाया गया की ये ब्राह्मण लोग हर विदेशी आक्रमणकारी के पास जाते उनका स्वागत करते उनकी शान में कसीदे पढ़ते और उनसे कहते की खुद ब्राह्मण भी उनकी तरह ही विदेशी हमलावर है इसलिए उन पर रहम की नजर रखी जाए यही नहीं गैर-इस्लामिक लोगो पर लगने वाला जजिया भी इन पर नहीं लगता था

Brahmins were exempted from payment of jazia. AS THEY APPROCHED THE MUSLIMS KING AND SAID THAT THEY ARE INVADERS LIKE THEM AND THEY ARE NOT HINDU . /////////27. Lanepool, Medieval India, p. 104, History of Punjab, Vol. III, edited FAuja Singh, Punjabi University, Patiala, 1972, p. 258

और आने वाले हर विदेशी हमलावर चाहे वो मुस्लिम रहे या अंग्रेज उनके सामने मूलनिवासियो को अपना गुलाम बना कर पेश किया
ब्राह्मणों ने इन निम्न स्तर की जातिओ का मानसिक ,शारीरिक आर्थिक शोषण सदीओ तक किया और आज भी कर रहे है , ये लोग बिलकुल नहीं चाहते की दलित लोग आगे बड़े या पढ़े , ये सिर्फ इनको जानवरों की तरह ही गुलाम रखना चाहते है

शुद्रो को ब्राह्मण मुसलमानों से लड़वाने के लिए जब इस्तेमाल करते है तब ये जातिया हिन्दू होती है
मुसलमानों से लड़ने के बाद ये सारे लोग अनेक जातियों में बाँट जाते है इन्हें फिर समाज में गन्दी नजरो से देखा जाने लगता है और सारी गंदगी फैलाता है ब्राह्मण .

जब दलितों को शुद्रो को आगे बढ़ने की बात आती है तो ब्राह्मण ही सबसे पहला व्यक्ति होता है जो दलितों के अधिकार के खिलाफ बोलता है , ये इनकी शिक्षा का विरोध करता है , इनके आरक्षण का विरोध करता है और इनको मिलने वाली हर सविन्धानिक सुविधाओं का विरोध करता है

और फिर मुसलमानों का डर दिखा फिर हिन्दू हिन्दू करने लगता है , समाज को बांटने में असमानता फैलाने में ये लोग माहिर है और बंटा हुआ समाज कभी भी तरक्की नहीं कर सकता