क्रांतिकारी महानायिका फूलन ,पुरे विश्व में महिलाओं का आदर्श बन गई है Great Revolutionary woman of the World become the Pride of India
| 08 Mar 2019

जन उदय : वैसे ये कमाल की बात है अपनी पत्नी को त्यागने वाला प्रधानमंत्री आज महिला दिवस पर महिलाओं को बधाई दे रहा था , लेकिन इस देश की नहीं बल्कि पुरे विश्व की सबसे ज्यादा क्रन्तिकारी महिला फूलन देवी को भूल गया . फूलन देवी को मानव इतिहास की उन क्रांतिकारी महिलाओं में चौथा स्थान प्राप्त है जिन्होंने इतिहास में महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा क्रन्तिकारी कदम उठाये . जिन लोगो को अगर पता भी नहीं तो उन्होंने
फूलन देवी पर बनी फिल्म बेंडिट क्वीन देखि ही होगी जो फूलन देवी के जीवन पर बनी थी जिसका निर्माण शेखर कपूर ने किया था

हम सीधा आते है फिल्म के उस द्रश्य पर जिसमे क्षत्रिय समाज के बहादुर लोग निहत्थी फूलन देवी को पकड कर ले आते है और उसके हाथ पाँव बाँध कर उसका कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया जाता है
इस बात पर गौर की जाए की जब फूलन को पकड़ा जाता है तब धोखे से पकड़ा जाता है और उसे निहत्था कर उसके हाथ पाँव बाँध उसका सामूहिक बलात्कार किया गया .

लेकिन वाही फूलन देवी जब अपने साथिओ के साथ हथियार के साथ आती है तो वही बहादुर , जो बहादुर थे डाकू थे , क्षत्रिय समाज की शान थे दूम दबा कर डरपोक की तरह मैदान छोड़ भाग जाते है , जिसके बाद फूलन १६ लोगो का सरेआम क़त्ल कर देती है

खैर उसके बाद भी इन वीर बहादुरों में इतनी हिम्मत नहीं आती की फूलन को अकेले दूंढ ले और उससे बदला ले ,
खैर इसके बाद फूलन ने आत्म-समर्पण किया ,सांसद बनी लेकिन इस वीर बहादुर समाज के लोगो में कभी इतनी हिम्मत नहीं आई की फूलन के सामने आ कर कभी टक्कर ले ,

और जब फूलन की हत्या शेर सिंह नामक वीर बहादुर ने मौका देख धोखे से फूलन पर उस वक्त गोली चलाई जब वो फिर निहत्थी थी , यानी इन लोगो में कभी भी फूलन से लड़ने लायक हिम्मत कभी नहीं थी जो आमने सामने आ कर मुकाबला करे ,
बात कुछ भी नहीं बात है महिलाओं के अधिकार की उनके सम्मान की और उसके लिए लड़ाई की जो उन्होंने खुद लड़ी और इस लड़ाई से वे समाज में परिवर्तन लाई .

आज भी हमारा समाज जातिओ में बंटा है और उसी के आधार पर महिला आन्दोलन भी ये बड़े दुःख की बात है की ये अपर कास्ट महिलाए जो महिलाओं के नाम पर राजनीती और पद प्रतिष्ठा की मलाई तो खाती है लेकिन अपनी जातिवादी मानसिकता के चलते कभी भी महिला अधिकारों की सच्ची लड़ाई नहीं लडती


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