क्या सरगढ़ी युद्ध आधारित केसरी फिल्म / देशभक्ति और भीमा कोरेगाव युद्ध देश से गद्दारी था ?? झूट पे झूट क्यों गड रहे है घोड़े वाले :
| 23 Mar 2019

जन उदय : सबसे पहले हम उस युद्ध के बारे में बताते है जो निर्विवाद रूप से दुनिया का सबसे बड़ी बहादुरी वाला युद्ध था जिसे १ जनवरी १८१८ में भीमा कोरेगाव में लड़ा गया , यह युद्ध अंग्रेजो की महार रजिमेंट के ५०० जवान और पेशवाओ की २९००० हजार की सेना के बीच लड़ा गया और इस युद्ध में महार रजिमेंट के मात्र ५०० जवानो ने २९००० की सेना को धुल चटा दी थी और युद्ध को जीत लिया .

इस युद्ध के बारे तथाकथित घोड़े वाले देशभक्त जो दिन रात द्नागे करवाने में माहिर , देश से गद्दारी करने में माहिर खुद अंग्रेजो के चमचे रहे वो लोग कहते है कि महारो का इस युद्ध को लड़ना एक देशद्रोह वाला काम था और इस युद्ध के पर्व बनाने पर इन घोड़े वाले चुटियाधारी देशभक्तों ने कह्राम मचा रखा था
अब इतिहास के दुसरे ऐसे ही एक युद्ध पर आते है इसे battle of saragarhi कहा जाता है और अब इस पर अक्षय कुमार की फिल्म केसरी आ गई है

उस वक्त १८५७ की क्रांति कुचली जा चुकी थी, लेकिन पठान कंट्रोल में नहीं आरहे थे... 36th sikkh regiment के २१ सिपाही सारागढी में तैनात थे जब क़रीब दस हज़ार पठानो ने उन पर हमला कर दिया.... इस युद्ध में २१ सिक्ख सैनिकों ने १८० पठानो को मार गिराया और अपूर्व शौर्य का प्रदर्शन किया

लेकिन महत्वपूर्ण बात ये कि पठान अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे और ये सिपाही अंग्रेज़ों की तरफ़ से... मतलब हीरो कौन था??? देशभक्त कौन था????? अगर महार गद्दार थे तो क्या सिख देशभक्त थे ??एक ही तरह के कार्य को देखने के दो चश्मे क्यों ?? या सिर्फ इसलिए सिख देशभक्त कहलाते है क्योकि वो लोग आज भी ताकतवर है और उनके खिलाफ बोलने वाले के खिलाफ एक तरह का गृहयुद्ध छेड़ देते है . और महारो के खिलाफ इसलिए चिल्ला सकते है क्योकि ये लोग सामाजिक आर्थिक रूप से कमजोर है ???

अगर देखा जाए तो दोनों ने अपनी नौकरी पूरी की लेकिन महारो के खिलाफ जो जहर भाजपा / आर एस एस ने घोला है उसकी पूर्ति कौन करेगा ?? और ये लोग तो हमेशा से ही देशभक्ति के नाम पर देश से गद्दारी करते आये है इसका इतिहास गवाह है

इस बात को हम और स्पष्ट कर देते है की मनिकार्नम फिल्म झांसी की रानी पर आई है ये फिल्म भी एकदम झूट पर आधारित है क्योकि झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई एक डरपोक की तरह झांसी छोड़ भाग गई थी और उसकी जगह जो लड़की युद्ध के मैदान मे आई थी उसका नाम झलकारी बाई था वह लड़ी थी अंग्रेजो से , इसके अलावा टीवी पर आने वाले शो चाणक्य पर आधारित चन्द्रगुप्त मौर्य भी है , कमाल की बात यह है की चाणक्य नाम का कोई भी किरदार या व्यक्ति चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में नहीं था इस बात की पुष्टि मगस्थनिज़ ने अपनी पुस्तक इंडिका में लिखा है
तो सवाल यही है की इस तरह की झूट क्यों गड़े जा रहे है क्यों इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है