प्राचीन कला केन्द्र की तिमाही बैठक में सुमित्र की मधुर झंकार एवं शिजंनी के सधे हुए कत्थक की भावपूर्ण प्रस्तुति
| 01 Jul 2019

भारतीय संस्कृति एवं संगीत कलाओं को समर्पित संस्था प्राचीन कला केन्द्र आज नए आयाम छू कर नई उंचाईयों पर विराजमान है क्यांे कि केन्द्र ने देशभर में भारतीय कला एवं संगीत के प्रचार, प्रसार एवं विस्तार में अवस्मरणीय योगदान दिया । केन्द्र देश भर में संगीत कार्यक्रमों का आयोजन सिलसिलेवार कर रहा है । इसी लड़ी मे केन्द्र दिल्ली में 12 वीं तिमाही बैठक का आयोजन किया गया । ‘‘लिजैंडस आॅफ टुमारो’’ श्रृंखला के तहत होने वाली इस बैठक को इस बार सधे हुए सितार वादक सुमित्र ठाकुर एवं जानी मानी कत्थक नृत्यांगना शिजंनी कुलकर्णी के कत्थक से सजाया गया था । इस कार्यक्रम का आयोजन त्रिवेणी कला संगम में सायं 6रू30 बजे किया गया । इस कार्यक्रम के अवसर पर केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने दिल्ली के संगीत प्रेमियों को दिल से धन्यवाद दिया ।

पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन की रस्म के बाद कार्यक्रम की शुरूआत सुमित्र ठाकुर के सितार वादन से हुई । सुमित्र ठाकुर एक सांगीतिक परिवार से सम्बन्ध रखते हैं । इन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा प्रशांत ठाकुर से प्राप्त की । उपरांत पंडित कुशल दास के शिष्यत्व में संगीत की बारीकियां सीखी । इन्हें उस्ताद रशिद खां साहिब के शिष्यत्व में भी सीखने का अवसर प्राप्त हुआ । देशभर में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके सुमित्र आईसीसीआर के ग्रेडिड कलाकार हैं। दूसरी तरफ शिजंनी आज की युवा पीढ़ी की घरानेदार कलाकार हैं । महान कत्थक प्रतिपादक गुरू पंडित बिरजू महाराज की पोती होने के साथ-साथ शिजंनी एक सधी हुई कत्थक नृत्यांगना भी है ।
कार्यक्रम की शुरूआत सुमित्र ठाकुर के मधुर सितार वादन से हुई । सुमित्र ने राग से कार्यक्रम की शुरूआत की । आलाप से शुरू करके सुमित्र ने जोड़ का सुंदर प्रदर्शन कर दर्शकों की तालियां बटोरी । उपरांत झाला की मधुर प्रस्तुति से कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए। उपरांत विलम्बित द्रुत ताल का सुंदर प्रदर्शन किया । कार्यक्रम का समापन इन्होंने एक मीठी धुन से किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । इनके साथ तबले पर युवा रोमान खान ने बखूबी संगत की ।
झनकते सितार के पश्चात लयबद्ध घुंघरूओं से शिजंनी ने कार्यक्रम के दूसरे भाग को सजाया । सबसे पहले इन्होंने भक्तिमयी प्रस्तुति ओंमकार से कार्यक्रम की शुरूआत की । उपरांत तीन ताल में शुद्ध कत्थक नृत्य की प्रस्तुति पेश की । इसके पश्चात धमार पर खूबसूरत प्रस्तुति देकर कत्थक नृत्य पर अपनी मजबूत पकड़ एवं कला प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन किया । कार्यक्रम का अंत शिजंनी ने महाराज बिन्दादीन द्वारा रचित दादरा से किया । जिसके बोल थे ‘‘कैसे के जाउं श्याम रोके डगरिया’’ । शिजंनी ने इसके द्वारा भाव पक्ष पर भी अपनी प्रतिभा को बखूबी निभाया इनके साथ मंच पर मंझे हुए कलाकारों में अनुव्रत चैटर्जी तबले पर,जुहैब हसन गायन पर और गुलाम मोहम्मद ने सारंगी पर बखूबी संगत की ।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्ार डाॅ.शोभा कौसर, सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया ।