इतिहास के ये सच क्यों छिपे है अब तक ? डॉ. राजेंदर प्रसाद सिंह
| 02 Jul 2019

इतिहास के ये सच क्यों छिपे है अब तक ? डॉ. राजेंदर प्रसाद सिंह
नर्मदा का अति प्राचीन नाम चाहे जो भी हो, मेगस्थनीज की भारत - यात्रा के दौरान इसका नाम बुद्ध से जुड़ा था।
मेगस्थनीज ने इंडिका में नर्मदा को Nerbudda कहा है। Nerbudda में जो Budda है, वह Buddha का ग्रीक स्टाइल है, जैसा कि कुषाणी सिक्कों पर ग्रीक में Boddo मिलता है।
Nerbudda में जो Ner ( नर ) है, वह जल बहने का सूचक है। पेन्नर, मनैर आदि नदियों में जो नर है, वहीं है जो नरबुद्दा ( Nerbudda) के नर में है।

बुंदेलखंड में बरसाती नाले को नरइया कहते हैं, ब्रजमंडल में छोटा नाला को नरिया बोलते हैं। काशी में नरिया मुहल्ला ही है। ...और नरिया, वह खपड़ा जिससे होकर खपरैल के घर के ऊपर पानी बहता है।
नर बहने का, बहने की प्रणाली का सूचक है। अंग्रेजी नर्व, नर्वस - सिस्टम में भी यहीं नर है।
नर्मदा कभी बुद्ध की नदी हुआ करती थी।


जिस हड़प्पा सभ्यता का केंद्र पंजाब तथा सिंध था, उसी पंजाब तथा सिंध के इलाके से 518 ई. पू. में ईरान के हखामनी साम्राज्य को सालाना 360 टैलेंट सोना ( Gold ) बतौर राजस्व जाता था।

360 टैलेंट सोना का मतलब 8300 किलो सोना या कहिए 8.3 टन सालाना !!!

यह आँकड़ा इतिहास के पिता ( द फादर आॅफ हिस्ट्री ) हेरोडोटस ने दिए हैं।

जब 1500 ई. पू. में हड़प्पा सभ्यता नेस्तनाबूद हो गई, तब फिर वो कौन - सी सभ्यता थी, जिसके खजाने में इतनी बेहिसाब समृद्धि थी?

स्ट्रैबो ने लिखा है कि सिकंदर के जमाने में झेलम से चिनाब नदी के बीच 300 नगर थे और झेलम से ब्यास नदी के बीच 9 राष्ट्र तथा 500 नगर थे।

जब 1500 ई. पू. में हड़प्पा सभ्यता के नगर उजाड़ दिए गए, तब फिर वो कौन - सी सभ्यता थी, जिसके पास इतने नगरों की रौनक थी?

हेरोडोटस ने लिखा है कि हखामनी साम्राज्य के पूरे प्रांतों में पंजाब तथा सिंध का इलाका जनसंख्या के मामले में सर्वाधिक गुलजार था।

जब 1500 ई. पू. में सिंधु घाटी की आबादी का नरसंहार हो गया, तब वो कौन - सी सभ्यता थी, जिसकी आबादी इतनी सघन थी?