बीपी मंडल के जयन्ती पर भूपेश बघेल का सम्मान
| 29 Aug 2019

बीपी मंडल के जयन्ती पर भूपेश बघेल का सम्मान

सुनील कुमार बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और सामाजिक न्याय की बात करने वाले और मंडल कमीशन के सूत्रधार बीपी मंडल की 25 अगस्त, 2019 को 101 वीं जयंती मनाई गई। बीपी मंडल को आरक्षण के जनक के रूप में देखा जाता है, इनकी जयंती पर देश में कई जगह कार्यक्रम होते हैं जिसमें ‘सामाजिक न्याय’ की लड़ाई लड़ने वाले संगठन काफी उत्साह में इस दिवस को मनाते हैं। इस बार यह दिवस और महत्वपूर्ण हो जाता है जब केन्द्र में भाजपा की दुबारा सरकार बनी है और भाजपा के पितृ संगठन आर.एस.एस. के मुखिया मोहन भागवत ने 19 अगस्त, 2019 को एक कार्यक्रम में कहा कि आरक्षण के समर्थक और विरोधियों के बीच में चर्चा होनी चाहिए। मोहन भागवत ने 2015 में भी आरक्षण का जिक्र किया था। आर.एस.एस के मुखिया द्वारा बार बार आरक्षण को लेकर चर्चा मेंं आना लोगों के मन में संदेह उत्पन्न करता है। एक तरफ लोगों के मन में आरक्षण खतम होने को लेकर डर बैठा हुआ है तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 15 अगस्त, 2019 को घोषणा की कि उनके राज्य में 72 प्रतिशत (ओबीसी 27, एस.सी. 13 और एस.टी. को 32 प्रतिशत) आरक्षण दिया जायेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, भारत में पहला राज्य बन गया है जहां पर 72 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा की गई है।

भूपेश बघेल की इस घोषणा से ‘सामाजिक न्याय’ की बात करने वाले लोगों के मन में खुशी का संचार हुआ है। ‘संविधान बचाओ संघर्ष समिति’ के द्वारा बीपी मंडल जयंती के अवसर पर 25 अगस्त को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कॉन्शटीट्यूशन क्लब में सामाजिक न्याय रत्न से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले शरद यादव ने भूपेश बघेल को ‘बीपी मंडल सामाजिक रत्न पुरस्कार’ स्मृति चिन्ह और मेडल से सम्मानित किया। सम्मान समारोह में भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल, शरद यादव, छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पी.एल. पुनिया, नेपाल के भू.पू. मंत्री विसेन्द्र पासवान, दिल्ली सरकार के मंत्री राजेन्द्रपाल गौतम, संविधान बचाओ संघर्ष समिति के अनिल जय हिन्द मंच पर मौजूद थे। इसके अलावा कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किये जिसकें डॉ. उदित राज, दिलीप मंडल, जितेन्द्र वघेल मयंक, डॉ रत्नलाल, डॉ. रमाशंकर कुशवाहा इत्यादी लोगों ने अपने विचार व्यक्त किया। वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला सामाजिक न्याय की तरफ ले जाती है। सभा कि अध्यक्षता अनिल जय हिन्द ने की। इस सभा में तीन प्रस्ताव पास हुआ 1) आरक्षण को लेकर देशभर में कार्यक्रम आयोजित करना; 2) कश्मीर में हो रहे दमन का विरोध और धारा 370 की पुर्नबहाली; 3) जातिवादी जनगणना हो। इन प्रस्तावों को अनिल चमड़िया ने पढ़कर सुनाया जिसको लोगों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

इस समारोह में भूपेश बघेल के पिता ने भी अपनी बात काफी जोरदार तरीके से रखी और ब्राह्मणवाद को चेतावनी दे डाली कि वर्ण व्यवस्था, मनु स्मृति को डुबो दो। उन्होंने नक्सलवादी और कश्मीरी जनता के संघर्ष का भी सर्मथन किया जो कि उनके मुख्यमंत्री पुत्र भूपेश बघेल के द्वारा किये जा रहे कामों से ठीक उलट है। उन्होंने कहा कि ओबीसी ने ही आर.एस.एस. को जिन्दा रखा है लेकिन वह अब जाग रहे हैं, छत्तीसगढ़ में एक भी ब्राह्मण नहीं जीत सकता है। कांग्रेस लोकसभा में इसलिए हार गई कि उसने बनिया, ब्राह्मणों को टिकट दिया था। छत्तीसगढ़ में बजट की कमी नहीं है जरूरत है भ्रष्टाचार मुक्त बजट बनाने की। ब्राह्मण अधिकारी छत्तीसगढ़ में विधायकों की बात नहीं सुनते हैं। उन्होंने कहा कि तीन सितम्बर से एक आन्दोलन चलाने जा रहे हैं कि ब्राह्मण अधिकारियों को छत्तीसगढ़ से बाहर कर आदिवासी अधिकारियों को लाया जाये। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद खत्म करने की बात की जा रही है लेकिन उन्होंने नक्सलवाद को अधिकार की लड़ाई बताया।

नेपाल के भू पू. मंत्री बिसेन्द्र पासवान ने कहा कि ‘‘भारत में कई जगह जाता हूं और देखता हूं कि 85 प्रतिशत लोग मान-मर्यादा की बात करते है जरूरत है उसको एक होने की। भारत में थोड़ा बहुत मीडिया में ओबीसी, एस.सी हैं भी नेपाल में 100 प्रतिशत मीडिया ब्राह्मणों के हाथ में हैं। नेपाल में सत्ता राजा के हाथ से, ब्राह्मण के हाथ में आ गया’’।

उदित राज ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘‘हम एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नेपाल गये थे जिसमें कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि अंग्रेज नेपाल में नहीं आये। उन्होंने कहा कि अंग्रेज नहीं आते तो भारत में आरक्षण लागू नहीं होता, पूना पैक्ट के कारण ही आरक्षण लागू हुआ। तामिलनाडु में पहले से 60 प्रतिशत आरक्षण लागू है लेकिन कांग्रेस की यह पहली सरकार है जिसने देश को मजबूत करने का काम किया है। इम्शोनल इश्यू पर लोग इक्ट्ठा हो रहे हैं लेकिन संवैधानिक अधिकारों पर या विनिवेश के मामले पर न तो ओबीसी और ना ही एस.सी के लोग इक्ट्ठे हो रहे हैं। सोशल इंजिनियरिंग का काम कभी बीएसपी ने किया अब भाजपा कर रही है। हम संसद में रहें या नहीं रहे सड़क की लड़ाई लड़ना बहुत जरूरी है इससे कार्यकर्त्ता मजबूत होते है।’’

अनिल जय हिन्द ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि ‘‘मोरारजी देसाई ने बीपी मंडल को मंत्री नहीं बनाया तो सांसदों के दबाव में उन्होंने पिछड़ा आयोग का चेयरमैन बनाया गया। उन्होंने कहा कि जिस लड़ाई को पेरियार, फुले, लोहिया, अम्बेडकर, बसपा ने लड़ा उस लड़ाई में भूपेश बघेल भी शामिल हो गये हैं। शरद यादव जी के दबाव में ही बीपी सिंह को मंडल आयोग कि सिफारिशों को लागू किया’’।

दिल्ली के मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि ‘‘रोहित वेमुला या पायल तड़वी के साथ जो अब देश मे किसी और के साथ नहीं होना चाहिए। हम आत्महत्या क्यों करें, आत्महत्या उनको करना चाहिए जिन्होने हमारे अधिकार छीने हैं। मैं मोहन भागवत को कहना चाहता हूं कि आइये कॉन्शटीट्यूशन क्लब में चर्चा हो जल-जंगल-जमीन को लेकर कि आपके पास ही ये क्यों हैं? उन्होंने कहा कि गुजरात के ‘‘रंगा विल्ला ने सारे संस्थान को अपने कब्जे में ले लिया है’’। ईवीएम के खिलाफ भी लड़ना होगा।

पी.एल. पुनिया ने कहा कि आज सबसे ज्यादा संतोष बी.पी. मंडल के आत्मा को होगा। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल की सरकार किसानों से 2500 रू. प्रति क्विंटल धान कि खरीद की जबकी भारत में 1750 रू. प्रति क्विंटल ही खरीदा जाता है। पूरे देश में ऑटो मोबाइल में 16 प्रतिशत मंदी की खबर आ रही है जबकि छत्तीसगढ़ में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है क्योंकि लोगों के हाथ में बघेल सरकार ने पैसा दिया है। उन्होंने कहा कि 25 नवम्बर, 1949 को डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि राजनैतिक अधिकार तो मिल गये हैं लेकिन सामाजिक-आर्थिक बराबरी नहीं मिला है। इस गैर-बराबरी को जितनी जल्दी कम किया जाये ठीक है नहीं तो लोग इस को ध्वस्त कर देंगे। आरक्षण का कोटा इतने समय बाद भी पूरा नहीं किया गया है, प्राइवेट में भी आरक्षण की जरूरत है। न्यायपालिका द्वारा आरक्षण को लेकर जो भी फैसला आया है वह आरक्षण के खिलाफ है। जरूरत है एस.सी, एस.टी., ओबीसी को एक होने की और मोहन भागवत के बदले में भूपेश बघेल को लाईये।

शरद यादव ने कहा कि तामिलनाडू में 60 प्रतिशत आरक्षण लाने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ा लेकिन 72 प्रतिशत आरक्षण बघेल साहब ने पुरुषार्थ से ला दिया।

दिलीप मंडल ने कहा कि कमलनाथ की सरकार ने भी आरक्षण बढ़ाने की बात कही है जो स्वागत योग्य है। शिक्षा क्षेत्र में आरक्षण कांग्रेस के समय ही लागू हुआ लेकिन कांग्रेस इस बात को हिम्मत के साथ बोल नहीं पाई वह डरती रही। आरक्षण देने से लोकतंत्र का विस्तार होता है इसमें डरने की कोई बात नहीं है। लोगों ने यह भी मांग उठाई कि रिजर्वेशन ऐक्ट होना चाहिए।

सम्मान समारोह के अन्तिम वक्ता के रूप में भूपेश बघेल ने अपनी बात रखते हुए कहा की गुजरात मॉडल हम 6 वर्ष से देख रहे हैं, छठवें वर्ष में शरद जी को एयरपोर्ट से बिना बाहर गये ही वापस लौटना पड़ा। 25 अगस्त सामाजिक न्याय के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, मंडल आयोग की रिपोर्ट के रचयिता बीपी मंडल की जयंती है। संविधान बचाओ संघर्ष समिति ने आज के ही दिन अगर मेरा सम्मान करने का फैसला किया है तो यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है और मेरे लिए भावुक कर देने वाला पल है। संविधान के अनुच्छेद 340 को लागू करते हुए सामाजिक न्याय का जो पहलू छूट गया था, वह मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू करने के साथ आज से 26 साल पहले एक हद तक पूरा हुआ था। सिफारिशों का जो हिस्सा ठीक तरह से लागू नहीं हुआ था, हमने छत्तीसगढ़ में उसे पूरा करने की कोशिश की है। हमने कोई खास काम नहीं किया हमने केवल संविधान की सिफारिशों को लागू कर अपना दायित्व निभाया है जो कि हमारा कर्तव्य है, हम संविधान की कसम खाकर मंत्री बने हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य तामिलनाडू से भौगोलिक दृष्टिकोण से बड़ा है लेकिन यहां कि आबादी का घनत्व सबसे कम है, एक 1 कि.मी. में 200 लोग रहते हैं। यहां पर सबसे ज्यादा खनिज पदार्थ है लेकिन 39.9 प्रतिशत गरीबी है, 36.6 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं, 41.5 प्रतिशत महिला एनिमिया से पीड़ित हैं। हमारी सरकार ने 20 लाख किसानों के 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किए हैं। किसानों से धान 2500 रू. प्रति क्विंटल के दर से खरीदे, जिसके कारण लोगों तक पैसा पहुंचा और सबसे ज्यादा भीड़ सर्राफा (सुनार) कि दुकानों पर हो रही है। जब पूरे भारत में ऑटो मोबाइल सेक्टर में मंदी है तो हमारे यहां 25 प्रतिशत कि बढोत्तरी हुई है।

1700 किसानों की 4200 एकड़ जमीन वापस कर दी। छत्तीसगढ़ में एस.सी. को 16 प्रतिशत आरक्षण था जिसको बीजेपी सरकार ने घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया था, हमने आकर आरक्षण को बढ़ाया। छत्तीसगढ़ सरकार ने हक दिलाने का काम किया है। केवल आरक्षण से समस्या का निदान नहीं होता है लेकिन यह एक अधिकार का सिम्बल है। हमारे प्रदेश में मोहन भागवत गौ हत्या कि बात नहीं करते क्योंकि हम सवाल पूछते हैं तो वह भाग जाते हैं। सरकार अगर गौशाला के लिए अनुदान देने लगे तो गाय पतली होती जाती है और गौशाला चलाने वाले मोटे होते जाते हैं। कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद है लेकिन हम कहते हैं कि छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या कुपोषण है जो कि मुझे लगता है कि देश की भी समस्या है। अगर कुपोषित बच्चे होंगे तो देश को स्वस्थ्य नहीं रख सकते आप मजबूत हिन्दुस्तान की परिकल्पना नहीं कर सकते। एस.सी., एस.टी., ओबीसी की आर्थिक मजबूती की लड़ाई छत्तीसगढ़ सरकार ने शुरू की है, मैं समझता हूं कि आरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लड़ाई लड़नी होगी।