आखिर क्यों पेश की है आर्य आक्रमण पर झूटी रिसर्च पुरातत्व विभाग ने ? / Why Archeological Survey of India Presenting Fake finding on Aryan Invasion
| 06 Sep 2019

आखिर क्यों पेश की है आर्य आक्रमण पर झूटी रिसर्च पुरातत्व विभाग ने ? / Why Archeological Survey of India Presenting Fake finding on Aryan Invasion

जन उदय : इसमें कोई शक नहीं की भारत की सभ्यता दुनिया की सभी प्राचीन सभ्यताओं में से एक है जिसमे मिश्र , मेसो-पटमिया आदि है . और इन भारत की इस पोराणिक सभ्यता की वैज्ञानिक पुष्टि भी विदेशी इतिहासकारों ने की है नहीं तो भारत की लोग सिर्फ इतना जानते थे की प्रथ्वी पर मानव की रचना ब्रह्मा जी के शरीर से हुई है , उनके मुख से ब्राह्मण निकला , हाथ से क्षत्रिय, पेट से वैश्य और पाँव से शुद्र जिसका कार्य सबकी सेवा करना है .
लेकिन विज्ञान जैसे जैसे आगे बड़ा तो भारत की सभ्यता पर विदेशी आर्य आक्रमण के हमले की पुष्टि हुई और जिसमे बताया गया की भारत के मूल निवासी आदि द्रविड़ है और भारत की वर्तमान सामाजिक रचना एक षड्यंत्र के तहत आर्यों ने की .

काल्नातर में यह आर्य विदेशी आक्रमण का सिद्धांत एक सामाजिक युद्ध में परिवर्तित हो गया है जिसके जरिये मूल भारतीय अपनी गुलामी की जंजीरे तोडना चाहते है . और यही कारण है की एक पुरोहित वर्ग भारत के इतिहास को बार बार तोड़ने मरोड़ने और बदलने की एक झूटी और गलत कोशिश करता रहाता है .

२०१६ में हरियाणा के राखिगढ़ी में एक ह्यूमन skelton पाया गया जिसे ४५०० बी सी पुराना बताया गया और यह भी बतया गया की यह दुनिया का सबसे पुराना human skelton है जो हड़प्पा की सभ्यता से भी पुराना है , ( हड़प्पा अब पाकिस्तान में है यह बात दिमाग में रखिये ) इसके जरिये ३१ अगस्त इंडिया टुडे की रिपोर्ट में बताया गया था की आर्य आक्रमण की लगभग पुष्टि है जिसकी वजह से हिंदूवादी संघठनो को काफी धक्का लगेगा ,
आज लगभग दो साल बाद यानी ६ सितम्बर २०१९ को archelogical सर्वे ऑफ़ इंडिया ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके यह बताया की इस skelton से यह मालूम हुआ है की इसमें आर्य डी एन ए इस skelton में नहीं मिला है यानी भारत में कोई भी आर्य आक्रमण नहीं हुआ .
. बड़ी अजीब सी बात है वैसे भी इस skelton से कहा साबित होता की भारत में आर्य आक्रमण हुआ है या नहीं , क्योकि यह skelton तो किसी भी मूल भारतीय का हो सकता है , लेकिन कमाल की बात यह है की बिना किसी ठोस सबूत के जिसमे कहा गया की हमने दो साल की रिसर्च की है यानी लगभग सो साल से जयादा के अध्यानो की पंडित जी ने एक बार में नकार दिया वो भी बिना सबूत के .

दरसल यह एक प्रयास है ए एस आई का जिसके जरिये भारत के लोगो को झूट परोसा गया है और एक षड्यंत्र के तहत गुमराह करने की कोशिश है .

वैसे कब आया कौन आया इससे कोई फर्क नहीं पढता लेकिन फर्क इस बात से पढता है की आप भारत में रहने के बाद क्यों इस देश से दुश्मनी किये हुए है ?? क्यों इस देश के लोगो को गुमराह करना कहते है क्यों उन्हें इंसानों का दर्जा नहीं देना चाहते क्यों इन्हें जानवर बना कर रखना चाहते है और आप सच छिपा रहे है तो कही न कही तो दाल में काला है

Why Archeological Survey of India Presenting Fake finding on Aryan Invasion
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