ई सिगरेट से ज्यादा खतरनाक है ध्रूमपान: विशेषज् तथ्य आधारित स्वास्थ्य पॉलिसी आवश्यक
| 03 Oct 2019

अपोलो कैंसर इंस्टीट्यूट के प्रमुख सलाहकार, डॉ. समीर कौल ने अपने अपने विचार रखें थे। इन विशेषज्ञों ने वर्तमान के आंकड़ो पर जोर दिया, जिसके अनुसार तंबाकू कई भारतीयों की जानें ले रहा है। हर हफ्ते लगभग 1.3 मिलियन भारतीयों की मौत होती है, जिसमें 25 हजार जानें तंबाकू के कारण जाती हैं। 2 में से एक व्यक्ति की मौत धूम्रपान के कारण ही होती है।

टोबैको हार्म रिडक्शन का आंदोलन विश्व स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई वैज्ञानिक संस्थानों ने यह स्वीकार किया है कि परंपरागत सिगरेट या बीड़ी की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ईएनडीएस) स्वास्थ्य को कम नुकसान पहुंचाती है। 69 देश ईएनडीएस का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें 36 ओईसीडी देशों में से 34 शामिल हैं। विशिष्ट देशों का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों ने यूके और कनाडा जैसे देशों का उल्लेख किया, जो सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के साथ ईएनडीएस का इस्तेमाल भी करते हैं। जबकि यूएई ने इस श्रेणी पर बैन लगा दिया था, लेकिन स्वास्थ्य के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए उसने बैन को फिर से हटा दिया।

भारत में कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण के लिए समर्पित संगठन के रूप में, बीसीपीबीएफ दी कैंसर फाउंडेशन ईएनडीएस को कम घातक साबित करने की लड़ाई को लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

नई दिल्ली स्थित अपोलो कैंसर इंस्टीट्यूट में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक्स के प्रमुख सलाहकार और बीसीपीबीएफ के अध्यक्ष, डॉ. समीर कौल ने बताया कि, “इस बात का पता लगाना आवश्यक है कि स्वास्थ्य के जोखिम को धूम्रपान ज्यादा बढ़ा रहा है या ई-सिगरेट परंपरागत सिगरेट पर रोक लगाए बिना ई- परंपरागत सिगरेट पर रोक लगाए बिना ई-सिगरेट पर बैन लगाना उचित नहीं है। ईएनडीएस भारत में धूम्रपान की दर में गिरावट के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। जो लोग घूम्रपान को छोड़ने की इच्छा रखते हैं लेकिन लत के कारण छोड़ नहीं पा रहे हैं, ईएनडीएस उनके लिए धूम्रापन के ऐसे विकल्प उपलब्ध कराती है, जो कम हानिकारक हैं।”

नीति निर्माण वैज्ञानिक रूप से ठोस सबूतों पर आधारित होना चाहिए और जहां ऐसे प्रमाण कमजोर अवस्था में हों वहां रिसर्च की स्पीड बढ़ाने और प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर जोर देना चाहिए। इस जरूरत के साथ डॉ. कौल ने बीसीपीबीएफ - दी कैंसर फाउंडेशन के नेतृत्व में भारतीय विषयों पर उचित अध्यन की शुरुआत करने की घोषणा की।