नेत्रदान के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए वाकाथॉन का आयोजन विश्व दृष्टि दिवस- 10 अक्टूबर 2019
| 09 Oct 2019

नई दिल्ली,9 अक्टूबर 2019: नेत्रदान के महत्व और अंधेपन की रोकथाम के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए भारत के सबसे बड़े आई केयर हॉस्पिटल, सेंटर फॉर साइट ने विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर 3 किलोमीटर की वाकाथॉन का आयोजन किया।

इस वाकाथॉन में 200 से अधिक स्थानीय निवासियों ने भाग लिया। यह वाकाथॉन विभिन्न एनजीओ की मदद से आयोजित किया गया, जिसमें इंडियन यूथ क्लब, लाफ्टर कल्ब, मॉर्निंग वॉकर एसोसिएशन, कल्पवृक्ष- एक छोटा प्रयास, सांझी महिला विकास सम्मिती, ग्लोबल कॉलेज, ट्रस्ट फाउंडेशन, नेत्रहीन सेवा संस्थान, न्यू मेरी स्कूल, एजी-1 वेल्फेयर एसोसिएशन, साइन टीटीके और मिशन क्राइम फ्री इंडिया एनजीयो शामिल रहे।

इस वाकाथॉन और नुक्कड़ नाटक का मुख्य उद्देश्य लोगों में नेत्रदान और कोर्नियल अंधेपन के बारे में जागरुकता बढ़ाना है, जिससे आँखों की समस्या होने पर लोग उसे अनदेखा न करें और नेत्रदान को लेकर बनी धारणाओं को तोड़ा जा सके।

नई दिल्ली के विकासपुरी स्थित सेंटर फॉर साइट के नेत्र विशेषज्ञ, डॉक्टर तरुण चौधरी ने बताया कि, “भारत में नेत्र दान में कमी होने के कारण अंधेपन के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अन्य देशों की तुलना में, जहां 80% आबादी अपनी आँखों सहित कई अंग दान कर देते हैं, वहीं भारत में केवल 1% आबादी कैडेवर डोनेशन करती है। आँखों के आगे के हिस्से को कवर करने वाले टिशू को कोर्निया कहते हैं। बीमारी, चोट, संक्रमण या पोषण में कमी के कारण कोर्निया में धुंधलापन आने लगता है, जिससे व्यक्ति को कम दिखाई देने लगता है और धीरे-धीरे वह पूरी तरह से अंधा हो जाता है। यह आँखों की सबसे आम समस्याओं में से एक है और इसमें खराब कोर्निया को दान की हुई कोर्निया से बदलने से समस्या को ठीक किया जा सकता है।”

लोग आँखें दान नहीं कर सकते हैं, इस प्रकार की गलत धारणाओं को तोड़ते हुए डॉक्टरों ने खुलासा किया कि व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है, बस उसकी कोर्निया स्वस्थ होनी चाहिए। इस प्रकार का अंधापन विशेषकर बच्चों और युवाओं को प्रभावित करता है।

अंधेपन के वैश्विक बोझ में भारत की कुल आबादी का 11.2% हिस्सा शामिल है, जिसके अनुसार भारत में 15.12 करोड़ लोग अंधेपन का शिकार हैं, जिसमें से अधिकांश लोगों का इलाज संभव है। सेंटर फॉर साइट द्वारा की गई इस पहल की मदद से अधिक से अधिक लोग अपनी आँखों की सुरक्षा और नेत्रदान के महत्व को समझ सकेंगे।