आखिर क्यों डर लगता है संघियो को आंबेडकर से ? विक्षिप्ता की हद तक जाकर मिटा रहे है दलित चिन्हों को .अब बदला आंबेडकर चौक का नाम
| 29 Oct 2019

आखिर क्यों डर लगता है संघियो को आंबेडकर से ? विक्षिप्ता की हद तक जाकर मिटा रहे है दलित चिन्हों को .अब बदला आंबेडकर चौक का नाम

गुरुग्राम। संघी और जातिवादी सोच के लोगो को अम्बेडकर का भूत इतना डराता है कि ये लोग दिन रात केवल अम्बेडकर नाम से भयभीत हो जाते है और कही भी अम्बेडकर की मूर्ति या नाम दिखाई दे तो ये उसे मिटाने या हटाने में जुट जाते है , ऐसी ही एक घटना दिल्ली के पास गुडगाँव से आ रही है जहा पर

खांडसा रोड़ पर सेक्टर 37 और गांव खांडसा के समीप अम्बेडकर चौक पर नगर निगम ने मनमानी करते हुए बीकानेर चौक के नाम से बोर्ड लगा दिया है। जबकि इस चौक का नाम शुरू से ही अम्बेडकर चौक है। विश्व के नंबर वन सर्च इंजन गूगल मैप और नगर निगम के मैप में भी चौक का नाम अम्बेडकर चौक अभी भी साफ देखा जा सकता है।

अखिल भारतीय भीम सेना ने इस बारे में आधिकारिक तौर पर नगर निगम के अधिकारियों को सूचित किया लेकिन बीकानेर चौक का बोर्ड हटाकर अम्बेडकर चौक का बोर्ड नहीं लगाया गया। कोई सुनवाई नहीं होने से भीम सेना गुस्से में आ गई है और आने वाली 2 नवम्बर को अम्बेडकर चौक बचाओ आंदोलन का ऐलान कर दिया है। जिससे प्रशासन के हाथ पांव फूल गए हैं। भीम सेना ने चेतावनी दी है कि चौक पर वास्तविक रूप से अम्बेडकर चौक का बोर्ड निगम द्वारा नहीं लगाया गया तो शहर में चक्का जाम कर दिया जाएगा।

आरोप है कि इस स्थान पर नगर निगम की ही जमीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा करके बीकानेर स्वीट्स के नाम से एक रेस्टोरेंट बनाया हुआ है। निगम के अधिकारियों ने बीकानेर स्वीट्स और उसके मालिक को फायदा पहुंचाने के लिए इस चौक का नाम बदलकर बीकानेर चौक कर दिया है। भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर का कहना है कि यह चौक पब्लिक प्रोपर्टी है ना कि किसी की व्यक्तिगत प्रॉपर्टी। इस चौक का नाम संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहब डॉ० भीमराव अंबेडकर जी के नाम से है। जिसे बदलकर हरियाणा सरकार और निगम के अधिकारी तानाशाही कर रहे हैं। तंवर ने बताया कि शुरू से ही यह अम्बेडकर चौक है।

उन्हें अंदेशा है कि निगम के अधिकारियों ने कोई मोटी पुड़िया खाकर इस चौक का नाम बदला है। भीम सेना चीफ नवाब सतपाल तंवर ने चेतावनी दी है कि बहुजन महापुरुषों के नाम के साथ खिलवाड़ कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाली 2 नवम्बर को भीम सेना विरोध में सड़कों पर उतरेगी। गांव खांडसा की अम्बेडकर चौपाल से अम्बेडकर चौक बचाओ आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। यदि फिर भी तुरंत प्रभाव से वास्तविक रूप में अम्बेडकर चौक का बोर्ड नहीं लगाया गया तो पूरे शहर में चक्का जाम किया जाएगा। किसी भी तरह के जान माल कि हानि का जिम्मेदार नगर निगम ही होगा।

हलांकि ये कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले दिल्ली में ६०० साल पुराना रविदास मंदिर तोड़ दिया गया देश के अलग अलग स्थानों से अम्बेडकर की मूर्ति तोड़ने की खबरे आती ही रहती है