भाजपा-शिवसेना की शादी टूटी : नवेन्दु उन्मेष
| 11 Nov 2019

अंततोगत्वा महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना की चुनावी शादी टूट गयी और फडणवीस को राज्यपाल की अदालत में तलाक की अर्जी लगानी पड़ी। चुनाव के बाद पहली बार लोगों कीे समझ में आया कि राजनीतिक दल भी प्रेमी-प्रेमिका रखते हैं। अगर एक प्रेमी या प्रेमिका शादी करने से इनकार कर दे तो दूसरी भी तैयार रखते हैं। अगर शादी न भी करें तो कम से कम मोबाइल पर प्रेमालाप अवश्य करते रहते हैं। ताकि प्रेम संबंध टूट जाये तो दूसरा प्रेमी सहारा
देने के लिए तैयार रहे। शिवसेना ने भी ऐसा ही किया। प्रेम तो वह भाजपा से करती रही लेकिन हनीमून किसी भी दल के साथ मनाने के लिए तैयार है। इसमेंचाहे एनसीपी, कांग्रेस या कोई भी दल क्यों न हो। वैसे कई सालों से दोनों
दल शोले फिल्म के जय और बीरू की तरह गीत गुनगुना रहे थे- ‘ ये दोस्ती हमनहीं तोड़ंेगे, तोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे। तेरी जीत मेरी जीत,मेरी जीत तेरी हार, सुन ऐ मेरे यार, जान से भी खेलेंगे, तेरे लिए ले
लेंगे सबसे दुश्मनी। ‘
दोनों दलों की शादी से पहले खूब बैंड बाजा बजी। वोट मिलने के बाद दोनोंदलों ने गली-गली में बारात निकाले और लोगों ने विधायक बने दूल्हा-दूल्हनको फूलों की माला से लाद दिया। बैंड वाले भी क्या खूब संगीत बजा रहे
थे-‘ले जायेंगे, ले जायेंगे दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे। रहजायेंगे-रह जायेंगे, पैसे वाले देखते रह जायेंगे।‘ लेकिन सचमुच ऐसा ही
हुआ। पैसे वाले तो क्या बिना पैसे वाले भी तमाशा देखते रह गये। भाजपा कोमा या मिली न राम। इसके बाद मुंबई की गलियों में भाजपा के लोग गा रहे थे-‘दिल तोड़ के हंसती हो मेरा, वफायें मेरी याद करोगी। मेंहदी प्यार वाली
हाथों में रचाओगी, घर मेरे बाद गैर का बसाओगी। वफायें मेरी याद करोगी।‘

अब देखना यह है कि शिवसेना भाजपा की वफाओं को कितने समय तक याद करती है या भाजपा शिवसेना की वफाओं को कितने दिनों तक याद रखती है। आखिर शादी टूटनी थी सो टूट ही गयी। मुंबई की गलियों में अब सन्नाटा पसर गया है। न तो अब भाजपा के दफतर में खुशी के बैंड बज रहे है और न शिवसेना के दफतर
में। राज्यपाल की अदालत को जो निर्णय करना है करते रहें। इससे किसी दल को
कोई मतलब नहीं हैं। अब देखना यह है कि शिवसेना किसके साथ मिलकर शादी का
नया जोड़ा पहनती है।

राज्यपाल की अदालत में तलाक की अर्जी सौंपने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। यहां तक कि शिवसेना के 50-50 के फार्मूले को खारिज करते हुए कहा दोनों दलों के बीच मुख्यमंत्री
पद को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था। लेकिन शायद फडणवीस को नहीं मालूम कि अब 50-50 का ही जमाना आ गया है। इसी 50-50 को अर्द्धनारीश्वर कहते हैं। जिसमें पति-पत्नी को समान अधिकार मिलते हैं। वैसे भी वर्तमान का युग 50-50 का है। लोग 50-50 की बिस्कुट खा रहे हैं। ऐसी बिस्कुट को स्वाद लेकर खा रहें है और पचा भी रहे हैं। तारीफ में कह रहे हैं कि इससे हाजमा अच्छा रहता है। कहा जा सकता है कि अब प्राइवेट-पब्लिक मोड पर सरकारी
योजनाओं को चलाया जा रहा है तो अगर सरकार 50-50 पर बनने की बात की जा रही है तो कोई गलत बात नहीं है। अब तो आने वाला समय ही बतायेगा कि शिवसेना किस दल के साथ शादी का जोड़ा पहनती है। तब बैंड वाले बजायेंगे-‘आज मेरे यार की शादी है लगता है जैसे सारे संसार की शादी है।‘

नवेन्दु उन्मेष

सीनियर पत्रकार