क्या दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में सचमुच नया क्या है या रिबन काट आम आदमी पार्टी सरकार
| 27 Nov 2019

जन उदय : मोदी सरकार की तरह केजरीवाल की सरकार भी रिबन काट सरकार रही है दिल्ली में कुछ नया हुआ है ऐसा न तो किसनी कुछ देखा और न ही कही पढ़ा हां केजरीवाल के भाषणों में कभी केंद्र सरकार को कोसना और और कभी चमचागिरी जरूर नजर आती है .

शिक्षा और स्वास्थ के क्षेत्र अपने काम को सबसे अलग दिखाने वाले केजरीवाल यहाँ भी लोगो को और उन पत्रकारों और बुद्दिजीवियो को भी बरगलाते नजर आ जाते है जिन्हें न तो सही ढंग से इन दोनों क्षेत्रो की जानकारी है और न ही समझ

शिक्षा के क्षेत्र और स्कूलों के क्षेत्र में सबसे पहले केजरीवाल यह नहीं बताते की दिल्ली के स्कूलों में कितने शिक्षको की कमी है है और इन्होने जो थोड़े बहुत शिक्षक भर्ती किये है वे सिर्फ ठेकेदारी प्रथा के तहत क्यों भर्ती किये है , यानी इसमें एक बहुत बड़ा झोल है और वो झोल है आरक्षण का अगर केजरीवाल दिल्ली में जिन ३५००० शिक्षको की आवश्यकता है अगर उनको भर्ती करते है तो उसमे विधि अनुसार आरक्षण देना पढ़ेगा और उनकी सेलरी बहुत ज्यादा होगी जो ये अपनी दलित विरोधी मानसिकता के चलते करना नहीं चाहते

दूसरा बच्चो को शिक्षा किस तरह की हो उन्हें किस तरह के माहोल में रखा जाए , बच्चो को किताबो के बोझ से कैसे दूर रखा जाए परीक्षा का क्या पैटर्न हो यह नई शिक्षा निति जिसमे शिक्षाविद वर्मा कमिटी की रिपोर्ट से लेकर अब तक बहुत सारे परिवर्तन आ चुके है , लगभग दिल्ली सरकार उन्ही पर काम कर रही है तो इसमें क्या विशेष है समझ से एकदम परे है

दिल्ली के कुछ स्कूलों में बिल्डिंग बनाने के लिए खेल के मैदान को बिलकुल समाप्त कर दिया गया है यानी बच्चो के स्वास्थ और खेल कूद का जीवन एकदम समाप्त

दिल्ली में कितने नए स्कूल खुले है यह भी आजतक पता नहीं चल पाया है
केजरीवाल चूँकि आर एस एस की विचारधारा और दलित विरोधी रही है इसलिए इनकी टीम तरह तरह के फर्जी फोटो और विडियो सोशल मीडिया पर डाल कर लोगो को घुम्राह करते रहते है
इस तरह के बहुत सवाल है जो दिल्ली की जनता को सोचने होंगे