कोर्ट ने पूछा क्यों बदला चौक का नाम। आपको अम्बेडकर से क्या आपत्ति है।
| 05 Dec 2019

कोर्ट ने पूछा क्यों बदला चौक का नाम। आपको अम्बेडकर से क्या आपत्ति है।
अम्बेडकर चौक मामले पर डीसी और निगम कमिश्नर को कड़ी फटकार।

गुरुग्राम। खांडसा रोड़ पर सेक्टर 37 के समीप अम्बेडकर चौक का नाम बदलने के मामले पर कोर्ट ने डीसी और नगर निगम कमिश्नर को कड़ी फटकार लगाई है। अखिल भारतीय भीम सेना की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नवीन कुमार की अदालत ने पूछा किस आधार पर और क्यों अम्बेडकर चौक का नाम बदला गया। आपको अम्बेडकर से क्या आपत्ति है। डीसी और नगर निगम कमिश्नर की तरफ से सरकारी अधिवक्ताओं ने कोर्ट से समय मांगा है।
इस पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए नाराजगी जताई है कि प्रशासन संविधान निर्माता के नाम के साथ छेड़छाड़ कर रहा है। इस पर अधिकारियों को सांप सूंघ गया है। उन्हें जवाब देते नहीं बन रहा। अधिकारियों के पास उक्त स्थान पर अम्बेडकर चौक का बोर्ड लगाकर कोर्ट में जवाब देने का अलावा कोई रास्ता नहीं है। भीम सेना के द्वारा फेंके गए इस पासे में निगम अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी फंसते नजर आ रहे हैं। साथ ही बीकानेर स्वीट्स पर भी गाज गिरनी तय है।

दूसरी तरफ बीकानेर स्वीट्स की तरफ से व्यक्तिगत पेशी हुई। कोर्ट ने बीकानेर स्वीट्स से पूछा है कि निगम के किस अधिकारी के साथ मिलीभगत करके चौक का नाम बदला गया। भीम सेना की तरफ से एडवोकेट बलदेव मेहरा ने खुली बहस करने की मांग की। जिसपर प्रशासन ने कोर्ट से समय की मांग की।

मुख्य याचिकाकर्ता भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर, राष्ट्रीय प्रभारी अनिल तंवर, राष्ट्रीय महासचिव अभय सिंह, गुरुग्राम जिला प्रभारी सूबेदार धर्म सिंह और गुरुग्राम जिला अध्यक्ष कैलाश रंगा ने बताया कि अम्बेडकर चौक का नाम बदले जाने के पीछे निगम के अधिकारियों ने बड़ी मिलीभगत की है।

जिस पर कोर्ट इंक्वायरी होनी चाहिए और दोषियों को सस्पेंड कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। एडवोकेट बलदेव मेहरा ने कोर्ट को बताया कि अम्बेडकर चौक का नाम बदलकर बीकानेर चौक किए जाने के पीछे निगम अधिकारियों के साथ रुपयों का बड़ा लेनदेन हुआ है। एडवोकेट मेहरा ने बताया कि बीकानेर स्वीट्स को भी निगम की जमीन पर अवैध रूप से कब्ज़ा करके बनाया गया है।

जिसे तोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तारीख मुकर्रर की है। आने वाली 20 दिसंबर को इस मामले पर खुली बहस होगी। निगम के पास उक्त स्थान पर अम्बेडकर चौक का बोर्ड लगाकर कोर्ट को जवाब देने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। भीम सेना की इस बड़ी कार्यवाही से प्रशासन के हाथ-पांव फुले हुए हैं।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन उक्त स्थान पर अम्बेडकर चौक का ही बोर्ड लगाने की तैयारी का रहा है। पिछली 2 नवंबर को भीम सेना ने बड़ा आंदोलन किया था और खांडसा रोड़ को जाम कर दिया था। जिसके बाद से यह विवाद ओर भी अधिक गरमा गया था। निगम के अधिकारियों के लचीले रवैए को देखते हुए भीम सेना ने कोर्ट की शरण ली है। हालांकि अपनी गलती स्वीकारते हुए निगम ने बीकानेर चौक के बोर्ड को तो हटा लिया था लेकिन अम्बेडकर चौक के नाम से बोर्ड नहीं लगाया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि ये बवाल शांत होगा या एक बार फिर से तूल पकड़ेगा।