Mental Health Risks: .लोकतंत्र के लिए खतरा बनते न्यूज़ चैनल विध्वंश मानसिकता विकसित कर रहे है .
| 29 Jan 2020

जन उदय : ये बात पूरी दुनिया के इतिहास में है साहित्य कला , पत्रकारिता सामाजिक परिवर्तन की लड़ाई में एक हथियार का काम करती है इसमें हाई आर्ट से लेकर लो आर्ट तक शामिल है आज तक पूरी दुनिया में चाहे जितनी भी क्रांति हुई है उसमे साहित्य कला का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है .समय के चलते किताबो , कला , नाट्य से आगे बढ़ करके कला और साहित्य के और परिष्कृत और विकसित रूप हमारे सामने आये है , सोशल मीडिया , व्ह्तात्सप्प ,न्यूज़ चैनल सिनेमा इनके विकसित रूप है .

इन माध्यमो की ताकत और असर को देखते हुए राजनैतिक वर्ग ने इसका राजनीतिकरण करना शुरू कर दिया और ये सारे के सारे माध्यम धीरे धीरे विचारधाराओं को पोषित करने लेगे और इसका सबसे कारण रहा की इन माध्यमो के संचालन और इस्तेमाल में पैसे का आ जाना यानी जिसके पास ज्यादा धन है वह इन माध्यमो का ज्यादा और अपने लिए इस्तेमाल कर सकता है

ये बात अलग है इन माध्यमो के इस्तेमाल और ताकत को देखते हुए समय समय पर पूरी दुनिया में इसकी इन माध्यमो की जवाबदेही और नैतिक मापदंड भी निर्धारित किये गए लेकिन आज वर्तामन समय में जिस तरह सोशल मीडिया (आई टी सेल ) और न्यूज़ चैनल और अखबारों के मालिक एकदम बेलगाम घोड़े की तरह हो गए है और इन्होने समाज के लिए कई प्रकार के खतरे पैदा कर दिए है

पहला खतरा लोकतंत्र को खतरा , दुसरा मानसिक स्वास्थ /हिंसक परवतिया पैदा करना ,तीसरा प्रोपगेंडा करना
भारत में आज मीडिया संस्थान यानी न्यूज़ चैनल और अखबार लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए है न्यूज़ चैनल पुरे दिन भर अपने अपने चैनल पर कुछ ख़ास तरह की न्यूज़ चैनल कुछ ख़ास तरह की न्यूज़ चला चला कर लोगो को ब्रेन वाश करने की कोशशि में लगे है , खबरे नहीं होती है तब भी खबरे बनाई जाती है और पुरे जोर शोर से इनका प्रचार किया जाता है , स्रजिल इमाम , और जे एन यु के कनाहिया के एडिटेड विडियो इस बात की गवाही देते है ख़ास पार्टी के प्रचार तंत्र बने चैनल एक से एक फर्जी सर्वे निकालते है अपने आकाओं के लिए

दुसरा एक बहुत बड़ा खतरा है इन न्यूज़ चैनल से की इनकी खबरे देख देख के देश के लोगो का मानसिक स्वास्थ खतरे में पढ़ गया है इंडस वैली पीपल फाउंडेशन ने महानगरो और कस्बो के युवाओं पर न्यूज़ चैनल के असर का एक सर्वे किया तो इसमें पाया गया की दोनों ही जगहों पर युवाओं में एक चिंता , तनाव के कारण न्यूज़ चैनल रहे क्योकि ये उन खबरों पर भरोसा कर रहे थे , ९९.९ % युवा भारत के न्यूज़ चैनल पर भरोसा करके इस चिंता में है कि भारत किसी न किसी युद्ध को देखेगा और इस बार युद्ध में जान माल की बहुत हानि होगी और इसमें इनका भी नम्बर आ सकता है , न्यूज़ चैनल पर खबरे देखने के बाद शंकित और डरे हुए रहते है यानी लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ आज खुद लोकतंत्र के लिए एक खतरा बन गया है और ऐसा लगता है जैसे ये लोग लोकतंत्र को बर्बाद कर देंगे ,सुबह से लेकर रात तक जिस तरह ये न्यूज़ चैनल चलते है इनकी भाषा ,इनकी आवाज की टोन स्टाइल ,इनके फेसिअल एक्सप्रेशन केवेल और केवल हिंसक प्रतीत ही

तीसरा है प्रोपगेंडा संस्थान हर पार्टी अपने लिए कुछ ऐसी संस्थाओं की नियुक्त करती है जो उनके कामो और उनकी बातो को समाज के लोगो तक ले जाए और उसके पक्ष में एक राय कायम करे लेकिन अब न्यू चैनल और अखबार इसी तरह की पी आर अजेंसियो को काम पार्टियो के लिए कर रही है और अजीब अजीब से सर्वे , मीडिया रिपोर्ट , पैनल डिस्कशन दिखाते है जिससे उनकी आका पार्टी के लिए जनमत का निर्माण हो सके

कुल मिला कर न्यूज़ चैनल और मीडिया संस्थान भारत में लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गए है और न्यू चैनल के मालिक मारिओ पूजो के नावल के डॉन बन गए है जो अपने अपने एरिया में अपने आका की कमांड संभाले हुए है अगर कोई अन्य पार्टी सही कदम उठाती भी है तो ये उनको दबाने का काम करती है

अब देखना यह है क्या फ्रीडम ऑफ़ प्रेस के नाम पर हम ऐसे सफ़ेदपोश आतंकी संघठनो को काम करने देंगे या इनके खिलाफ हम कोई कार्यवाही करंगे या इनकी कोई उतरदायिक भूमिका का हम निर्माण करेंगे , क्या हम ऐसी मीडिया संस्थानों को नाग की तरह छोड़ देंगे और समाज और देश में जहर फैलाते रहेंगे , या सडको पर घुमने वाले आवारा पागल कुत्तो जैसे ये मीडिया संस्थानों पर कभी नकेल कासी जाएगी ?/



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