देश में जानवरों की गिनती होती है पर ओबीसी की नहीं।
| 17 May 2020

सन् 2021 की जातिगत जनगणना का कार्य प्रारंभ होने वाला है। सन् 2010 में लोकसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद भी कांग्रेस ने 2011 में ओबीसी की जनगणना नहीं कराई और अब ना ही 2021 में बीजेपी के द्वारा की जा रही है।
जातिगत जनगणना सन् 1871 में अंग्रेजी शासन काल में प्रारंभ की गई थी, जिसमें ओबीसी की गिनती भी की जाती थी, जो 1931 तक होती रही। परंतु 1951 से भारत की प्रथम सरकार ने ओबीसी की गिनती पर रोक लगाकर हिंदू मुस्लिम के आधार पर गिनती प्रारंभ की। जिससे ओबीसी को उनकी संख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व (आरक्षण) नहीं मिल पाया।

मोदी सरकार ने भी 2021 में ओबीसी की गिनती नहीं करने का जो फैसला लिया है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ओबीसी समाज के 90% लोगों ने भाजपा को वोट देकर सरकार बनाई और अब भाजपा ही ओबीसी की जनगणना नहीं करा रही। यदि ओबीसी की जनगणना होती है और संविधान के नियमानुसार ओबीसी समाज के बच्चों को लगभग 2 करोड़ से अधिक शासकीय नौकरी मिलेगी।

इसलिए ओबीसी समाज के बुद्धिजीवी साथियों ने निर्णय लिया है कि आगामी जनगणना के इस प्रपत्र में ओबीसी का कालम जुड़वाने के लिए एक आंदोलन किया जाये। यह आंदोलन देश के अनेक राज्यों में प्रारंभ हो चुका है, जिसको "पारटी आंदोलन" नाम दिया गया है। इसमें अपने घर के सामने एक पट्टी लगानी है, जिस पर लिखा होगा कि- "जनगणना में ओबीसी का कालम नहीं होगा तो मेरा परिवार जनगणना में भाग नहीं लेगा।"
देश के 72 करोड़ ओबीसी समाज जागो।

यदि आप अपने बच्चों को उनकी 65% हिस्सेदारी दिलाना चाहते हैं, संविधान और लोकतंत्र को बचाना चाहते हो तो आंदोलन को सफल बनायें, सहयोगी बने और मैसेज को 100 लोगों को शेयर करें।

निवेदक
ओबीसी ललित कुमार
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय ओबीसी महासभा