भारत की इस बर्बादी का सेहरा मोदी/भाजपा के सर बीच मझधार में छोड़ दी नैय्या
| 17 May 2020

जन उदय : नरेंद्र मोदी बेबाक और मुश्किल फैंसले अचानक लेने के लिए भी जाने जाते है , न्यायिक संस्थाओं को कैसे कब्जे में लेना है ये भी इनको खूब पता है लेकिन कुछ फैंसले ऐसे होते है जिन्हें अगर सोच समझ कर उर सबकी राय से ही लिया जाए तभी बेहतर होते है और यही आदत लोकतंत्र को जिन्दा रखती है बल्कि इसे और भी खूबसूरत बनाती है

भारत में कोरोना का संक्रमण पूरी तरह सरकार की नाकामी और गलतियो का ही नतीजा है दस जनवरी को पहला केस मिला लेकिन इस बाद भी मोदी जी नमस्ते ट्रंप में लगे रहे है जिसकी वजह से गुजरात और महाराष्ट्र में कोरोना ने जड़ पकड़ी इसके बाद फरवरी में दिल्ली दंगा के बाद मध्य प्रदेश में सरकार बनाने में बीजी रहे

इसी बीच भारत में हवाई यात्रा से एक आंकड़े के अनुसार पन्द्रह लाख लोग भारत में आये और कमाल की बात कि पूरी दुनिया में महामारी बन चुके कोरोना के टेस्ट नहीं किये गए और जो लोग भारत आये उनकी ट्रेसिंग करके उन पर नज़र नहीं रखी गई

मोदी जी अचानक एक दिन प्रकट होते है और एक दिन का जनता कर्फ्यू लगा देते है और फिर लॉक डाउन वो भी बिना किसी सोचे समझे बिना किसी की राय लिए और बिना इस बात के विचार करे कि गरीब मजदूर जो एक राज्य से दुसरे राज्य में मजदूरी के लिए काम के लिए जाते है उनका क्या होगा वो लोग कैसे रहेंगे , बस आँख बंद की और कर दिया एलान और और जिसका परिणाम यह निकला की आज लाखो मजदूर बेरोजगार हुए , सडको पर चल रहे है प्रसाशन को समझ नहीं आ रहा है क्या करे कभी उन पर लाठी बरसाई जा रही है कभी उनको भगाया जा रहा है , लोग सडक पर दुर्घटना में मर गए रेल से कट कर मर गए और ये सिलसिला जारी है

देश में आज कोरोना संक्रमित लोगो की संख्या नब्बे हजार के करीब है और बाईस मार्च से लेकर अब तक सरकार ने यानी मोदी ने सिवाय बकवास और अपनी ओछी राजनीती के सिवाय कुछ नहीं किया कभी बंगाल पर सवाल , कभी राजेस्थान पर और इस बीच मोदी ने एक और दमनकारी खेल खेला वो नागरिकता कानून का विरोध करे रहे लोगो को पकड़ पकड़ कर जेल में डालने लग गए जिसकी वजह से पुरे विश्व में भारत की बदनामी हुई

और अब मोदी ने जब देखा की हालात काबू से बाहर है तो सब कुछ राज्यों के उपर छोड़ दिया यानी मोदी अब इस रण से भागते नज़र आ रहे है या ये कहिये की भाग चुके है अब देश में जो कुछ भी होगा इसका टीकरा राज्यों के सर पर ही फोड़ने का इरादा है मोदी का क्योकि हलात जल्द से तो सुधरने को रहे

मोदी ने जो राहत के नाम पर आर्थिक मदद का जो पैकेज दिया दरसल वह एक पैकेज कम गला घोटने का प्रबंध ज्यादा है जिसके जरिये छोटे मोटे कारोबारी , जो की लगभग ४५ प्रतिशत है ठेले वाले , सब्जी वाले पान वाले , बिजली प्लम्बर का काम करने वाले ऑटो वाले रिक्शा वाले , जिन्हें मिला कर ये ७० % हो जाते है , और मजदूर किसान को मिला कर ८५ % जनता जो अब तक पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी अब वो और भी बर्बाद हो जाएंगे , साहयता के नाम पर सिर्फ घोषनाए है , वादे है कागज के घोड़े है बाकी कुछ भी नहीं

यानी मोदी खुद भारत की बर्बादी का फरमान लिख चुके है जिसको राज्य सरकारों के नाम कर करना चाहते है
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