लॉकडाउन: तेरह साल की ज्योति ने अपाहिज पिता को साइकल से पुहुचाया गुरुग्राम से दरभंगा
| 20 May 2020

जन उदय : अपने अपाहिज पिता को तेरह आल की लड़की ने गुरुग्राम से दरभंगा का सफर कितनी जोखिम और होंसले से पूरा किया ये बात सुन कर सब हैरान हो जाते है

गुरुग्राम में अपने पिता के पास रहने आई ज्योति जब लॉक डाउन में यहाँ फंस गई और इसके बाद खाने पीने और पिता की दवाई का भी संकट पैदा हो गया उस वक्त इस नन्नी से तेरह साल की लड़की ने फैंसला किया कि वो अपने पिता को अपने ग़ाव लेकर जाएगी

पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने इस लड़की को बारह सौ रूपये में अपनी सेकंड हेंड साइकल बेचीं जिस पर बिठा इस लड़की ने शुरू किया अपना सफर

हलांकि ज्योति की तरह ही बाकी जो लोग सडको पर चल रहे है उनकी दास्ताँ भी कुछ ऐसे ही खतरों से भरी है मुसीबतों से भरी है सरकार प्रसासन ने सिर्फ लाठी बरसाई है गरीबो को पीट पीट कर उनकी टाँगे ही तोड़ी है
पिता मोहन पासवान ने,कहा "हम हिचक रहे थे क्योंकि बेटी तो दुबली पतली है और हम मोटे. लेकिन वो मानी नहीं और बोली कि जैसे सब जा रहे है, वैसे हम भी जाएंगे. सात मई को हम लोग रात में चले और 15 मई को यहां शाम को पहुंच गए थे. रास्ते में कई बार ट्रक वालों ने बैठाया. इसलिए रास्ता आसान हो गया. यूपी की पुलिस वालों ने खाने पीने को भी दिया लेकिन बिहार पुलिस ने कुछ नहीं दिया."

ज्योति बताती है कि उन्हें डर नहीं लग रहा था क्योंकि बहुत सारे लोग सड़क पर थे. वो रात में किसी पेट्रोल पम्प के आस पास रूकती थी और सुबह वहीं नित्यकर्म ने निवृत्त होकर आगे बढ़ती थी.
वो बताती है, "सबने मदद की. सब हमको देखकर चौंकते थे. लेकिन चौंक कर वो भी क्या करते, और हम भी क्यों कर सकते थे."

ज्योति पर सबको गर्व

ज्योति वापस आई तो पूरा गांव उसे देखने के लिए आया. ज्योति कहती है, " बहुत अच्छा लग रहा है. हम इतना अच्छा काम किए है. बेटा से भी बढ़कर काम किया है हमने." वही उसके पिता मोहन पासवान खुद को खुशकिस्मत समझते है. वो कहते हैं, "ऐसी बेटी मुश्किल से मिलती है."

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