अयोध्या खुदाई में मिली मूर्ति और रामयाण का वैज्ञानिक सच कुछ और कहता है
| 22 May 2020

जन उदय : उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन का समतलीकरण हो रहा है।
और बताया जा रहा है की इस वक्त इसके नीचे से शिवलिंग और हिन्दू देवी देवताओं की मुर्तिया निकला रही है और यह कहा जा रहा है की इनको एक संग्राहलय में रखा जाएगा यह बात सनद रहे कि केस के दौरान भी जिन हिन्दू देवी देवताओं की मूर्ति के मिलने का जिक्र किया गया था दरसल वो किसी भी हिन्दू देवी देवता की है नहीं बल्कि ये बौध धर्म से सम्बन्धित बताई गई थी जिसको मुस्लिम पक्षकार और .. . ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के महासचिव खालिक अहमद खान ने कहा कि जो अवशेष मिले हैं, वे बौद्ध धर्म से जुड़े हुए हैं।

दूसरी तरफ मूर्तियां मिलने पर इतिहासकार इरफान हबीब और प्रोफेसर रोमिला थापर को ट्रोल किया जा रहा है। दरअसल, इरफान हबीब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने तो सुप्रीम कोर्ट की इस बात को भी मानने से इनकार कर दिया था

उन्हीं की तरह इतिहासकार रोमिला थापर ने भी आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की खुदाई में मिले सबूतों को मानने से इनकार कर दिया था। क्योकि इस ए एस आई की जिस टीम ने ये रिपोर्ट बनाई थी उसको भी सरकार ने प्रभावित कर लिया था

अब इसके अलावा कुछ ऐसे वैज्ञानिक तथ्य आते है जिन्हें जानने के लिए किसी ख़ास तकनिकी ज्ञान की जरूरत नहीं है बल्कि जिसे भी सामान्य ज्ञान होगा
जैसे
भारत में एक वर्ग द्वारा फैलाई जा रही भ्रान्तियो के बारे में यानी रामायण और महाभारत कभी इस देश में हुए या नहीं या ये सिर्फ कोरी कल्पना है , इतिहास ने भी विज्ञान के नियमो को अपनाया है और इतिहास
का लेखन वास्तुनिष्ट सामग्री पर लेखन के लिए ही जो डाला गया है , और जब हम वास्तुनिष्ट सबूतों या सामग्री की बात करते है तो उस पर रामायण और महाभारत खरी नहीं उतरती , आइये देखे कैसे

कहानी रामयाण और महाभारत एक एपिक की तरह लिखे गए ज्सिका मकसद सिर्फ और सिर्फ एक राजनितिक षड्यंत्र तय्यार करना था जिसका पहला उधाह्र्ण है

1.कोई भी वास्तु /शिल्प सबूत नहीं : हर राजा , महाराजा , अपने लिए महल बनवाता है , भवन बनवाता है , बाग़ बगीचे बनवाता है और इन इमारतो को वह कुछ ख़ास तरीके से बनवाता है यानी हम अगर सम्राट अशोक का इतिहास देखे तो हमें सभी प्रकार के सबूत मिलते है वास्तु भी शिल्प भी लेकिन रामायण और महाभारत के इन अभिनेताओं का कुछ भी नहीं मिलता , कुछ संघटनो का कहना है की मंदिर मिले है भगवान् के तो कोई इनसे पूछे क्या भगवान् इन्हों मंदिरों से शासन करते थे ??

2 . हर शासक , राजा , महाराजा अपने शासन काल में अपने सिक्के यानी व्यापार के लिए सिक्के ,मुद्रा चलवाता है , जो निश्चित तोर पर उसकी सीमा और विदेश सीमा यानी उसके शासन के बाहर भी खुदाई में मिलते है लेकिन रामायण , महाभारत काल का ऐसा कुछ भी नहीं मिलता

३. विदेशो से सम्बन्ध एक राजा के लिए बड़े जरूरी होते है , युद्ध भी होते है संधिया भी होती है लेकिन इन दोनों काल के यानी रामायण और महाभारत काल का ऐसा कुछ भी सबूत नहीं मिलता

४. विदेशो से व्यापार , यात्रिओ के लिए धर्मशाला , सुरक्षा वाव्य्स्था बाग़ बगीचे , सराय ये सब भी रहा बनवाता है लेकिन इन दोनों काल का कुछ भी नहीं मिलता

५. संस्कृति – कला ,किसी भी इतिहास में या शासन में अपनी कला और संस्कृति जन्म लेती है , लेखक ,कवी आदि जन्म लेते है लेकिन न तो किताबो के स्तर पर कुछ भी नहीं मिलता , शिल्प , पेंटिंग , नक्काशी , वाल राइटिंग, वाल कार्विंग , भित्ति चित्र आदि इस काल का कुछ भी नहीं मिलता

६. कालखंड . सबसे बड़ी बात होती है कि कोई भी घटना किसी कालखंड में ही होती है यानी उसका अपना एक समय होता है लेकिन इन ग्रंथो का कोई भी कालखंड नहीं है कहने को तो हर धार्मिक संघठन अपनी अपनी दलील देता रहता है , कोई कुछ काल बताता है तो कोई कुछ

इसके अलावा जो ग्रन्थ या किताबे मिली है उनकी भी कार्बन डेटिंग से कोई सबूत नहीं मिलता की ये ग्रन्थ बहुत पुराने है बल्कि इसमें भी घपला है

सो विज्ञान धारणा या कल्पना से शुरू हो सकता है लेकिन हमने उड़ने की कल्पना की लेकिन उड़े कैसे ? इसलिए विज्ञानिक कोई भी तत्थ्य आज तक नहीं है और न ही आयगा
अब हम दुबारा से अयोध्या पर आते है तो क्या इस स्थान की खुदाई , कैमरा में नहीं होनी चाहिए ??
दुसरे मिली मुर्तीओ की कार्बन डेटिंग और अन्य आधुनिक तकनिकी से जांच नहीं होनी चाहिए , क्योकि अब जो कुछ भी मिल रहा है वह सब बौध संस्क्रती का हिस्सा है
दरसल इक दल का काम है भारत की सांस्क्रतिक विरासत को खत्म करना उसके स्थान पर झूठा और मंगद्न्त षड्यंत्रकारी संस्कृति को उपर रखना अन्यथा संघ जिस तरह की बाते करता है इसका इतिहासिक प्रमाण कोई नहीं कोई विअग्यानिक प्रमाण नहीं है बल्कि ये लोग अपनी ताकत के दम पर इसको तैयार किये जा रहे है

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