भारत में ऑनलाइन शिक्षा चुनोतियो से भरा क्षेत्र ,
| 22 May 2020

सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च और हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी एंड साइंस ने संयुक्त रूप से वेबिनार का आयोजन किया। इस खास वेबिनार में विषय था ऑनलाइन एजुकेशन और एसेसमेंट। इस वेबिनार में 21 राज्यों के 484 शिक्षाविद् और छात्रों ने भाग लिया।

देश में हर शैक्षणिक बोर्ड, कॉलेज, विश्वविद्यालय के पाठयक्रम अलग अलग हैं जिसका अपना एक अलग अर्थशास्त्र है। पाठयक्रम की असमानता एक बहुत बडी चुनौती है, जो ऑनलाइन शिक्षा के समुचित क्रियान्वयन में आडे आ सकती है। प्रो. केके अग्रवाल ने कहा कि भारत में ऑनलाइन शिक्षा के सामने बहुत सारे चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी है। खास तौर पर क्लासेंस मे जब छात्र चिंटिंग कर देते हैं तो ऑनलाइन में इसकी संभावनाएं काफी बढ़ जाती है इसे रोकना काफी मुश्किल है।

वेबिनार को संबोधित करते हुए एआईसीटीई के मेंबर सेक्रेटरी प्रो राजीव कुमार ने कहा कि तकनीकी समझ ऑनलाइन शिक्षा की एक बडी समस्या है। अगर तकनीकी शिक्षा से जुड़े अध्यापकों और विद्यार्थियों को छोड़ दें तो बाकी लगभग सभी विषयों से जुड़े शिक्षकों और शिक्षार्थियों को तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ता है। प्राइमरी और माध्यमिक स्तर पर यह समस्या बहुत बड़ी समस्या है। राजीव कुमार ने कहा कि आजकल छोटे छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक टेबलेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन के सहारे पढाया जा रहा है। ऐसे में अगर तकनीकी समझ किसी भी स्तर पर हावी होती है तो सिखने की क्षमता की सीधे प्रभावित करती है।

एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी के वीसी प्रो. संदीप संचेती ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण को सामान्यतः कक्षाओं की तरह नहीं चलाया जा सकता है। ऑनलाइन शिक्षा की कई दुष्प्रभाव भी हैं, लेकिन इसमें कई अपार संभावनाएं हैं।

हिंदुस्तान यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो के पी आईसेक ने कहा कि सरकार और शिक्षा जगत के लोग ऑनलाइन शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन भारत जैसे बड़े देश में ऑनलाइन शिक्षा में आने वाली बाधाओं से पार पाना है। जिसके लिए अभी कार्य करना होगा कमियों को दूर करने की जरूरत भी है।

सेंटर फॉर एजुकेशन ग्रोथ एंड रिसर्च के प्रेसिंडेंट व स्प्रिंगर नेचर के एमडी संजीव गोस्वामी ने वेबिनार में शामिल सभी शिक्षाविदों और छात्रों को निष्कर्ष रूप से कहा कि आज ऑनलाइन शिक्षा में कई तरह की समस्याएं हैं लेकिन इसे दूर करने के लिए हमें सामंजस्य बनाने होंगे। लेकिन यह भी तय है कि क्लासरूम की क्षतिपूर्ति ऑनलाइन से कर पाना भारत के संदर्भ में काफी मुश्किलें हैं

प्राप्त प्रेस रिलीज में ऑनलाइन एजुकेशन का सबसे बड़ा खतरे के बारे में जन उदय सम्पादक सुरेंदर कुमार ने इसमें एक बात यह जोड़ी कि ऑनलाइन एजुकेशन को केवल हेल्पिंग हैण्ड या सप्लीमेंट की तरह लिया जा सकता है अगर इसके जरिये पूरा का पूरा कोर्स निर्भर रहेगा या ये नियमित होता है तो इससे छात्रो के व्यक्तित्व पर काफी नकारत्मक प्रभाव होंगे और सबसे बड़ी समस्या कि बच्चा जो क्लास में रहकर सीखता है वह सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं सीखता बल्कि सामाजिकता भी सीखते है लीडरशिप की स्किल भी उसमे डेवेलोप होती है . इसलिए ऑनलाइन शिक्षा खतरों से भी भरी है