मजदूरों के सडक पर चलने और उन पर पुलिसिया आत्याचार के खिलाफ इंडस वैली पीपल फाउंडेशन की याचिका रष्ट्रीय मानवधिकार आयोग ने कबूल की
| 22 May 2020

जन उदय : सरकार अभी सिर्फ योजना बना रही है और मजदूरों को लिप सर्विस दे रही है उधर मानसिक और आर्थिक रूप से टूटे बेसहारा लोग अब भी पुलिसिया अत्याचार और प्रसाशनिक अनदेखी का शिकार हो रहे है , ये लोग अपनी जान को जोखिम में डाल अपने घरो की तरफ बढ़ भूखे प्यासे नंगे पाँव चल रहे है लेकिन मानवता और इंसानियत की सारी हदे सरकार ने पार कर दी

इंडस वैली पीपल फाउंडेशन दिल्ली ने इस बाबत एक मुहीम चलाई और एक ऑनलाइन पिटिशन डाली की इन मजदूरों पर पुलसिया अत्याचार बंद हो और इन्हें ख़ामोशी से इनके आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने दिया जाए , चलने दिया

यहाँ पर एक बात बता दे की इनमे से किसी भी मजदूर ने न तो सरकार से खाने की मांग की और न ही इन्होने रहने की जगह मांगी ये अपनी खुद्दारी सलामत रखते हुए अपने आप जब इनके घरो से इनके कामो से इनको निकाल दिया तो ये लोग अपने जीवन को बचाने के लिए अपने अपने ग़ाव चल दिए

मजदूरों की भीड़ जहा जहा बेकाबू हुई वहा पर सरकार और लोकल प्रशासन की गलती की वजह से इकट्ठे हुए सरकार इन्हें बस और ट्रेन चलाने के नाम पर इन्हें गुमराह किया इनकी गरीबी और बेबसी का मजाक उड़ाया फिर इन पर लाठी बरसाई , ये बात एक बार फिर से कह दे की इन मजदूरों ने सरकार से कोई मांग नहीं की थी ये तो सरकार अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए बार बार गुमराह कर रही है
यहाँ पर यह भी बता दे की देश में चाहे युद्ध का ही माहौल क्यों न हो उस हलात में भी कोई भी सरकार मजदूरों को घुमने फिरने या चलने से और वो भी अपनी जान बचाने के लिए कही जाने से नहीं रोक सकती यह अधिकार हमारे सविंधान के आर्टिकल इक्कीस में हमें इस बात का अधिकार देता है

इंडस वैली पीपल फाउंडेशन के निदेशक सुरेंदर कुमार ने बताया की सरकार अपनी किसी भी गलती के लिए गरीबो को बलि का बकरा नहीं बना सकती सरकार का लॉक डाउन का फैंसला देशवासियो की जान बचाने के लिए था न की उन पर अत्याचार करने के लिए यह एक अमानवीय कृत्य है जिसे सरकार ने किया है और यह भारत के इतिहास में वर्तमान सरकार के माथे के रूप में हमेशा चमकता रहेगा

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हमारी ऑनलाइन पिटिशन को स्वीकार कर लिया है लेकिन उस पर हम चाहते है की इस पर सरकार जल्द से जल्द कार्यवाही करे


Letter received from indus valley has been diarised by NHRC as 49795/CR/2020. This diary number may be used for future reference, if any.

ड्राफ्ट ऑनलाइन पिटीशन
Honorable Sir
in any emergency right to live and right to movement can not be encroached /snatched by any government it is our fundamental right as Article 21 in third schedule of the Constitution of Govt of India

Due to lock down people have lost their jobs , their shelters thereby left no mean to feed themselves .

they are forced to move back to their home town by using their own feet’s and means But even then Government machinery like police, is beating them , humiliating them ,abusing them ,and is not allowing them to walk on the road .

it is highly condemnable and is gross violation of human and as well as fundamental right enshrined in our constitution

Request to preserve at least their basic fundamental right that is Right to Live
https://www.change.org/p/supreme-court-ofindia-let-the-people-walk-on-road

Thank You
Indus valley People Foundation
www.indusvalleypeoplefoundation.org