VAAFT एव लेजर तकनीक से पाए फिस्टुला से निजात
| 17 Mar 2016

एनल फिस्टुला (भगंदर) एक ऐसा रोग है, जिसके इलाज में लापरवाही बरतने पर कालांतर में कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं। जैसे गुदा (एनस) में फोड़ा और सूजन, आतों में विकार या आंत में कैंसर और रेक्टम (मलाशय) की तपेदिक आदि।इसमें मरीज को दर्द होता है, जो लगातार रह सकता है। यह तेज दर्द होता है और बैठने पर बढ़ जाता है। मरीज को गुदा के आसपास खुजली हो सकती है। इसके अलावा सूजन होती है, त्वचा लाल हो जाती है और वह फट सकती है। वहां से मवाद या खून रिसता है। डिजिटल गुदा परीक्षण, फिस्टुलोग्राम और फिस्टुला के मार्ग को देखने के लिये एमआरआई किया जाता है | दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा अस्पताल के वरिष्ठ लाप्रस्कोपिक सर्जन डॉ़ आशीष भनोट के अनुसार सर्जरी इस रोग का एकमात्र उपाय है। फिस्टुला की परंपरागत सर्जरी को फिस्टुलेक्टॅमी कहा जाता है। सर्जन, सर्जरी के जरिये भीतरी मार्ग से लेकर बाहरी मार्ग तक की सम्पूर्ण फिस्टुला को निकाल देते हैं।
इसमें आम तौर पर टांके नहीं लगाये जाते हैं और जख्म को धीरे-धीरे और प्राकृतिक तरीके से भरने दिया जाता है। इस उपचार विधि में दर्द होता है और उपचार के असफल होने की संभावना रहती है। फिस्टुला के अंदर के मार्ग और बगल के टांके आम तौर पर हट जाते हैं जिससे दोबारा फिस्टुला हो सकता है। परंपरागत उपचार विधि में मल-त्याग में दिक्कत होती है। डॉ़ आशीष भनोट के अनुसार नवीनतम उपचार- वीडियो असिस्टेड एनल फिस्टुला ट्रीटमेंट (वीएएएफटी या संक्षेप में वाफ्ट VAAFT ) सुरक्षित और दर्दरहित उपचार है। यह डे केयर प्रक्रिया है और फिस्टुला का कारगर उपचार है। यही नहीं, यह इलाज फिस्टुला के दोबारा होने से रोकता है। इसमें पतली इंडोस्कोप का इस्तेमाल किया जाता है। इंडोस्कोप पूरे फिस्टुला के मार्ग में ले जाया जा सकता है और इस दौरान फिस्टुला को अच्छी तरह देखा जा सकता है। इससे सर्जन को लेजर के जरिये फिस्टुला को नष्ट करने में मदद मिलती है। इंडोस्कोप की मदद से सर्जन फिस्टुला के मार्ग को ठीक तरीके से बंद करने में सफल हो जाते हैं।