ज्योतिष शास्त्र भारत में नहीं अरब , मिश्र बेबीलोन में जन्मा , ब्राह्मणों ने इस्तेमाल किया षड्यंत्र के रूप में
| 30 Mar 2016


जन उदय : मनुष्य का भविष्य को जानने का अपने बारे में जानने की इच्छा बड़ी प्रबल होती है , गृह नक्षत्र की दशा , दिशा आदि से इंसान के भविष के बारे में बताना यह बड़ी पुरानी परम्परा है हलांकि इसमें विज्ञान कितना है यह कहना असम्भव है क्योकि इसमें विज्ञान बहुत कम है

अगर हम इसके , जन्म ,विकास के बारे में देखे तो हमें बड़ी हैरानी होगी की अपने आपको विश्व गुरु कहने वाला भारत विशेषकर ज्योतिष और तन्त्र मन्त्र में माहिल भारत में ज्योतिष का ज्ञान बहुत बाद में आया , बल्कि यह कह सकते है की ये ज्ञान कम और षड्यंत्र के रूप में जयादा आया

अब जरा इसके जन्म और विकास के बारे में थोडा जान लेते है

इसके प्रारंभिक सबूत 25,000 साल पहले हड्डियों और गुफा दीवारों पर आक्रति के रूप में मिले है जो बताते हैं की इन तारो और ग्रहों की गति से कैसे बारिश होगी चाँद निकलेगा , दिन निकलेगा यह ज्ञान इसी तरह चलता रहा लेकिन इसका सबसे पहला लेकिन बिखरा हुआ संकलन बेबीलोन में १७०० बी सी में मिला है उसी समय मिश्र , अरब , चीन , आदि सभी देशो में यह ज्ञान मिलता है .

भारत में ज्योतिष की परम्परा के ज्ञान को अपने साथ ले कर भारत आये यानी जब ब्राह्मणों ने हमला किया तो उनके साथ ये ज्ञान भी भारत आया , को वेदांग भी कहा जाता है जो अथर्वेद में ज्यादा मुख्य रूप से सामने आया है भारत में ब्राह्मणों द्वारा इस्तेमाल की जानी वाली ज्योतिष अरब देश , मिश्र आदि से ली गई
इससे पहले भारत का आकृति , गृह आदि सभी चीजो का ज्ञान था इसमें शक कैलेंडर आदि सब इस्तेमाल होते थे लेकिन ब्राह्मणों के आक्रमण के बाद शक संवत को बदल दिया गया और उसके स्थान पर विक्रम संवत को लाया गया

सबसे पहले यह ज्ञान सिर्फ शुद्ध ज्ञान के रूप में था इसलिए वैदिक ज्योतिष में ब्राह्मणों द्वारा बताये जाने वाले उपाय कही नहीं है , लेकिन बाद में लोगो को मुर्ख बनाने के लिए इन्होने उपाय आदि लिखना शुरू कर दिया और लोगो को मूर्ख बनाने लगे