किरण बेदी ने होलिस्टिक स्वास्थ्य पर डॉ. विनोद के. गुजराल की पुस्तक ‘‘ओके लाइफ’ का लोकार्पण किया
| 14 Apr 2016

नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2016: मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित आईपीएस अधिकारी (सेवानिवृत्त) डॉ. किरण बेदी ने आज इंडिया इंटरनेषनल सेंटर में आयोजित एक रंगारंग समारोह में ‘‘ओके लाइफ’’ नामक पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक का प्रकाषन ग्लिटरिंग इंक पब्लिशिंग हाउस ने किया है तथा इसे नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के प्रसिद्ध मधुमेह और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद के. गुजराल ने लिखा है।
पुस्तक के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. गुजराल ने कहा, ‘‘ओके लाइफ’’ पुस्तक आपको समग्र भौतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के स्तर के उत्थान में मदद करती है। आज आपको अपने जीवन के लिए न केवल जिम की जरूरत है बल्कि समग्र निवारण योजना बनाने की जरूरत है।’’ यह पुस्तक वर्शो से अधिक समय से लाइफ कोच के रूप में भूमिका निभा रहे लेखक के अनुभवों एवं सुझावों पर आधारित है।’’
पुस्तक का विमोचन करते हुए, डॉ बेदी ने कहा, ‘‘सभी तरह की पुस्तकें हमारे जीवन को बदल सकती हैं, लेकिन स्वास्थ्य की पुस्तकों में हमारी जीवन षैली की आदतों को प्रभावित करने की क्षमता होती है। आज की तारीख में दवाइयां भावनात्मक, आध्यात्मिक और यहां तक की मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान करने में विफल रही हैं।’’ डॉ. बेदी ने सुझाव दिया कि यह पुस्तक उन सभी लोगों के लिए है जो अपने जीवन पर समग्र रूप से नियंत्रण रखना चाहते हैं।’’
‘ओके लाइफ’’ देखभाल करने वालों तथा उनके प्रिय लोगों के लिए समग्र देखभाल के लिए उपयोगी गाइड है। इसमें षरीर, मन तथा आत्मा के स्वास्थ्य को बनाए रखने के सुझाव तथा जानकारियां हैं ओर ये सभी केयरगिवर के रूप में लेखक के निजी अनुभवों पर आधारित है। डॉ. गुजराल ने कहा, ‘‘स्वास्थ्य, दरअसल बीमारियों का अभाव ही नहीं बल्कि इससे अधिक है। हममें से ज्यादातर लोग जो अपने आप को इसलिए सौभाग्यषाली मानते हैं क्योंकि वे किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या से बचे हुए है और हम राहत का अहसास करते हुए कहते हैं, ‘‘अब तक सब अच्छा चल रहा है।’’ लेकिन जीवन के चौथे से छठे दशक के दौरान, उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, गठिया, हृदय की समस्याएं, मधुमेह, अस्वस्थता, उदासीनता या स्मृति लोप जैसी मानसिक समस्याएं पैदा होने लगी है। हम ऐसी समस्याओं को समान्य या अपरिहार्य समझ सकते हैं।’’
अधिक वजन तथा मोटापे के कम दर के बावजूद भारत में पष्चिमी देषों की तुलना में मधुमेह का प्रकोप अधिक है और इससे यह पता चलता है कि यूरोपीय लोगों की तुलना में भारतीयों में बहुत कम बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) होने पर भी मधुमेह हो सकता है। इसलिए जिन पतले भारतीयों की बीएमआई अपेक्षाकृत कम है उन्हें मोटे लोगों के समान मधुमेह होने का बराबर का खतरा है। वर्श 2030 तक भारत में सात करोड़ 94 लाख लोग (करीब आठ करोड़) मधुमेह से ग्रस्त होंगे।
डॉ. विनोद कुमार गुजराल ने कहा, ‘‘हालांकि मोटापा मधुमेह होने का पहले नंबर का कारण है, लेकिन भारतीय लोगों को डिसिलिपिडेमिया तथा उच्च घनत्व की लिपोप्रोटीन के कम स्तर के कारण कोरोनरी धमनी रोग होने का खतरा आनुवंशिक रूप से अधिक है और इन तथ्यों के कारण भारतीय लोगों में अन्य देषों के नागरिकों के तुलना में मधुमेह होने का खतरा अधिक है। इस समस्या का एक पहलू नकारात्मक शारीरिक स्थिति है और दूसरा पहलू सामाजिक हठधर्मिता है।’’
डॉ. गुजराल ने मधुमेह पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं जिनमें उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘‘चीनी कम’’, ‘‘षुगर केयर’’ और ‘‘आर यू गुड एट हार्ट’’ भी षामिल है। उन्होंने ‘‘डायलेमा’’ नामक कहानी भी लिखी है। ‘‘ओक लाइफ’’ सभी प्रमुख ई- कामर्स स्टोरों पर तथा प्रमुख बुकस्टोरों में उपलब्ध होगी।
अधिक जानकारी के लिए, कृपया फोन करें: डॉ. विनोद गुजराल: 9811077671