भारतीयों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावे पर मिले “के.एल. गंजू”
| 29 Apr 2016

अफ्रीकी महाद्वीप के इस्लामिक देश-कोमोरोस द्वीप पर भारत की तरफ से तैनात ग़ैरसरकारी प्रतिनिधि /कान्सलजनरल-के•एलगंजू जी की पुस्तक-'दा गोल्डन डिकेड 2005-2015' प्रेस कांफ्रेंस में भारतीयों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावे पर मिले•एलगंजू। यूक्रेन में भारतीय छात्रों के साथ हुई दुःखद वारदात पर शोक प्रकट करते हुए गंजू ने कहा कि फिलहाल कोमोरोस द्वीप पर भारत का कोई छात्र नहीं पढ़ता क्योंकि वहां कोई बड़ी यूनिवर्सिटीन हीं है।
हालांकि 30 भारतीय परिवार वहां ज़रूर रहते हैं और उनको मिलने जो रिश्तेदार वहां जाते हैं वो पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इसके अलावा कोमोरोस द्वीप के 150 छात्र भारत में पढ़ते हैं जिनके वो गार्जियन हैं और वो भी भारत में पूरी तरह सुरक्षितहैं जिसके लिए वो भारत सरकार को धन्यवाद कहते हैं।

इस मौक़े पर भारत सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के सवाल पर गंजू ने कहा कि भारत सरकार नेहालही में कोमोरोस द्वीप से आने वाले यात्रियों को वीज़ा ऑन अराइवलकर दिया है।
इसके अलावा वहां से भारत में होने वाले आयात-निर्यात पर भारत की तरफ सेडिस्काऊंटकर दिया गयाहै।
कोमोरोस द्वीप से आने वाले पर्यटकों कोसब्सिडी देने की भी बात चल रहीहै। भारत- कोमोरोस के समबंधो पर आधारित कौंसुल जनरल श्री के.एल गंजू के जीवन से प्रेरित ( दी गोल्डन डिकेड २००५- २०१५ ) नामक पुस्तक का विमोचन डॉ शशि थरूर , सांसद (लोक सभा) , पूर्व विदेश मंत्री भारत सरकार एवं अनेक देशो के राजदूतों द्वारा किया गया

श्री के.एल. गंजू वो हस्ती है जिन्होंने भारत और कोमोरोसके संबंधो को उचाईया देने का श्रेय इनको दिया गया है ।कोमोरोस हिंद महासागर में एक संप्रभु द्वीपसमूह द्वीप राष्ट्र पूर्वोत्तर मोजाम्बिक और पश्चिमोत्तर मेडागास्कर के बीच अफ्रीका के पूर्वी तट पर मोजाम्बिक चैनल के उत्तरी छोर पर स्थित है । इसकी राजधानी मोरोनी है
अबतक कोमोरोस के भारत मे 100 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर चुके है जिसके सूत्रधार श्री गंजू है।कोमोरोस में भारत को चिकित्सा के क्षेत्र में गढ माना जाता है ।
अनेक कोमोरोस नागरिक इलाज कराने भारत आते है और यहा की संस्कृति, शिक्षा, खान – पान एवं सभ्यता को करीब से समझते है. पहले ये दोनो देश एक दूसरे से अपरिचित थे लेकिन जब श्री गंजू को डिप्लोमेट बनाकर भेजा गया तो मानो जैसे चमत्कार हो गया हो . दोनों देशो में अच्छी मित्रता के साथ साथ भारतीय इलाज को कोमोरोस में ऊचा दर्ज़ा मिला हर साल सैकड़ो की तादाद में वहा के लोग भारत इलाज के लिए आते है . वहा सिर्फ फ्रेच भाषा बोली जाती है इंग्लिश का ज्ञान वहा के नागरिको को नही है । वो लोग भारत में आकर कैसे यहा की सभ्यता में ढल जात्ते होंगे आप खुद अंदाज़ा लगा लेंगे इसका श्रेय श्री गंजू को दिया जाता है । जिन्होंने अपने कार्यकाल में अनेक कोमोरोसमरीजों की तन- मन से सेवा की वे लोग जब भारत से वापस गये तो यहा की संस्कृति के सामने नतमस्तक हो गये ।

18 भागो में यह लिखी पुस्तक भारत- कोमोरोस की इतिहासिक धरोहर है ।जिसमे दोनों देशो के संबंधो का सम्पूर्ण वर्णन किया गया है । पुस्तक विमोचन के मोके पर डॉ शशि थरूर , पुस्तक के लेखक डॉ पी.वी जोशी आई .एफ. एस. (सेवानिवृत्त ।),राजदूत बोस्निया और हर्जेगोविना डॉ सबित सुबेसिस, श्री ऐलम टेसहेवी बोल्डमरियम, इरिट्रिया के राजदूत और भारत में अफ्रीकी मिशन प्रमुखों के डीन,
डोमिनिकन गणराज्य और भारत में राजनयिक कोर के डीन एवं राजदूतश्री फ्रैंक हंस. कौंसुल जनरल श्री के.एल. गंजू की मेजबानी में उपस्थित रहे । इस अवसर पर डॉ शशि थरूर का कहना था की .........जब सबको यह लगता था की भारत और कोमोरोसके सम्बन्ध अधिक अच्छे नहीं है ‘ तब श्री गंजू दोनों देशो के संबंधो में सूत्रधार बने ,
सम्बंधो को उडान मिली ये एक ऐसी हस्ती है । जो सिर्फ भारत में नहीं वरन अपने कार्यो के चलते कोमोरोस में भी प्रख्यात है । दो देशो की सभ्यता, शिक्षा, संस्कृति इनके अथक प्रयास स्वरुप ही करीब आयी। ये पुस्तक भविष्य के डिप्लोमेट्स के लिए एक प्रेरणा साबित होगी।