न्यूज़ चैनल देख कर बन सकता है आपका बच्चा हिंसक और अपराधी : मनोवैज्ञानिक अध्यन
| 12 Dec 2016

जन उदय : आज के दौर को हम सूचना का युग कहते है आज जिसके पास जितनी सूचना है वही ज्यादा ताकतवर है और ये सूचना का एक साधन है समाचार यानी अखबार , वेब पोर्टल , और न्यूज़ चैनल
अखबार को कभी एक बहुत बड़ा हथियार समझा जाता था जिसने अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ने में , सामाजिक चेतना जगाने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई .

अखबारों और समाचार एजेंसिओ का असर देखते हुए आजादी के बाद सभी पार्टियो ने अपने अपने अखबार चलाये और देश की आम भोली भाली जनता को अपने तरीके से गुमराह करने की कोशिस करते रहे जनता के बीच षड्यंत्र रचते रहे अंधविश्वास , अज्ञानता को खूब जम कर फैलाया और इसी बीच समाचार जगत की नैतिकता पर भी सवाल उठते रहे लेकिन विचारधारा की लड़ाई में पत्रकारिता की आत्मा पिस कर रह गई

जब से समाचार जगत में न्यूज़ चैनल ने कदम रखा तो लोगो को शब्दों के साथ साथ द्रश्य भी दिखने लगे और और इस माध्यम का महत्व और बढ़ गया ,लेकिन षड्यंत्र और न्यूज़ चैनल की मानसिकता में कोई परिवर्तन नहीं आया यानी न्यूज़ चैनल के माध्यम से भी पार्टी पक्ष विचारधारा का प्रचार होने लगा .. इसके बाद समय बहुत ही खतरनाक आ गया जब इस क्षेत्र में में भी टी आर पी और चमचागिरी का दौर चल पड़ा और टीवी न्यूज़ को एक बहुत बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा और सबसे अधिक चिंता की यह बात रही की इस क्षेत्र में यानी न्यूज़ चैनल बनाने वाले बिल्डर , और ऐसे पूंजीपति आ गए जो जो स्वयं अपराधिक प्रवर्ती के है
साल २०१४ तक आते आते स्थिथि इतनी विकट हो गई की जी न्यूज़ इंडिया टीवी और अन्य सभी चैनल अपने अपनी अपनी गाडिओ में भाजपा के झंडे लगाने लगे .

लेकिन न्यूज़ चैनल से बच्चो में अपराधिक चरित्र और हिंसा कैसे विकसित हो सकती है अब ये अध्यन बहुत ही महत्व पूर्ण बन कर हमारे सामने आया है जिसके कारण यहाँ दिए गए है

टीवी की भाषा : न्यूज़ चैनल चाहे कोई राष्ट्रीय खबर दिखाए या ग्लोबल या पाकिस्तान से या खेल की इसकी भाषा में बहुत हिंसा भाई हुई है खेल में कहते है पाकिस्तान को रोंद देंगे , उनसे बदला लेंगे , डंक , हथियार आदि शब्द देखने और सुनने को मिल रहे है

आवाज : चाहे लड़की हो या लड़का न्यूज़ चैनल के लोगो की भाषा को और उनके स्टाइल को सभ्य बिलकुल नहीं कहा जा सकता न्यूज़ एंकर स्क्रिप्ट को तो हिंसक परवर्ती से लिखता ही है साथ ही उसको पढने या बोलने के स्टाइल में अपनी जीवन की कुंठा और हिंसा को मिला देता है और सुर को ऊंचा ऊंचा करके आक्रमणकारी अंदाज में बोलता है

मनोवैज्ञानिक काफी समय से इस बात पर काफी चिंतित थे क्योकि कुल मिला कर टीवी कार्यकम के माध्यम से बच्चो में हिंसक प्र्वर्तिया पनप रही है लेकिन न्यूज़ चैनल से भी ऐसा हो सकता है इन अध्यनो ने मनोवैज्ञानिको को चिंता में दाल दिया है .

मनोवैज्ञानिको ने अपने अध्यन में पाया है की जो माँ बाप अपने बच्चो को सूचना के लिए न्यूज़ चैनल देखने देते है वह एक तरह का अपराध है क्योकि इसमें खबर कम होती है , न्यूज़ एंकर की भाषा और स्टाइल उसके अंदर यानी अवचेतन मन में एक हिंसा का भाव भर देता है , कभी गाय के नाम पर कभी मंदिर के नाम पर कभी कश्मीर के नाम पर कभी पाकिस्तान के नाम पर बच्चो में हिंसा का भाव पनपने लगता है और जब कोई और बात बच्चे के जीवन में होती है तो बच्चा इसी तरह के शब्द और स्टाइल इस्तेमाल करता है और कई बार इस हिंसक परवर्ती का इस्तेमाल करता है

अध्यानो में यह पाया गया है की न्यूज़ चैनल देखने वाले १०० % बच्चो में हिंसक परवर्ती देखने को मिली है
इसलिए अगर आप अपने बच्चो को हिंसा और अपराध से बचाने चाहते है और चाहते है की आपके बच्चे अपराधी न बने तो आपको चाहिए की उन्हें न्यूज़ चैनल से दूर रखे